काली हल्दी ( Kali Haldi)

सामान्य हल्दी को तोडने से वह अंदर से पीली दिखाई देती है, परंतु काली हल्दी को तोडने पर वह अंदर हल्की काली दिखाई देती है। वास्तव में हल्दी की एक जाति काले रंग की भी होती है, इसे ही काली हल्दी कहते हैं। सामान्य (पीली) हल्दी के ढेर में भी 10-20 गांठ काली हल्दी निकल ही आती है। आजकल काली हल्दी की खेती अलग से भी की जा रही है।

जहां पीली हल्दी रसोईघर के अतिरिक्त औषधि निर्माण, पूजा-पाठ तथा उबटनादि में प्रयोग होती है, वहीं काली हल्दी तंत्र शास्त्र के अनुसार धन-वृद्धिकारक वस्तु के नाम से प्रसिद्ध है। काली हल्दी को प्रयोग में लाने के लिये इसे किसी शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजन करवा लेना चाहिये। कायदा तो यह है की काली हल्दी के पौधे को पहले गुरूपुष्य योग में हाथ में चावल लेकर विधिवत निमंत्रण देकर आना और फिर दूसरे दिन प्रात: एक लकडी के टुकडे द्वारा भूमि से खोदकर शुद्ध जल से धो कर गंगाजल से शुद्ध कर लें, फिर इसे एक पीले कपडे में रखकर घर ले आयें। इसे किसी शुद्ध मुहूर्त में विधिवत पूजन करके प्रयोग में ला सकते हैं। इस प्रकार पीले वस्त्र में अक्षत् के साथ गांठ बांधकर अपनी तिजोरी में रखने से धन व सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस का पूरा-पूरा लाभ तभी होता है, जब इस की प्राप्ति से लेकर पूजा और फिर मंत्र के प्रयोग का पूरा-पूरा ध्यान रखा जायेगा। 

काली हल्दी के सौभाग्य वृद्धि के अतिरिक्त भी कुछ तांत्रिक प्रयोग हैं:- 1. अदृश्य शैतानी शक्ति को नष्ट करने के लिये। 2. सौंदर्य साधना। 3. वशीकरण प्रयोग। 4. आकर्षण प्रयोग। 5. उन्माद नाशक प्रयोग। इन सभी की जानकारी गोपनीय है।

Deepawli Pooja muhurat 2016

इस वर्ष 2016 में 30 अक्तूबर के दिन दीपावली पर्व है। हर वर्ष दीपावली पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।दीपावली की रात्रि प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन की परम्परा आदिकाल से चली आ रहा है। इस दिन का ज्योतिषीय महत्व है यह है की दो प्रमुख ग्रह सूर्य व चन्द्रमा इस दिन तुला (शुक्र की राशि) में विचरण कर रहे होते हैं।

कार्तिक अमावस्या की रात्रि स्थिर लग्न (वृष या सिंह) में महानिशीथ काल में महालक्ष्मी का पूजन करने से माता लक्ष्मी साधक के घर स्थाई निवास करती हैं।

इस वर्ष यह दीपावली महालक्ष्मी पूजन का शुभ तथा विशेष मुहूर्त 30 अक्तूबर 2016 के दिन सॉय 18:28 से आरम्भ होकर 20:22 तक रहेगा।

इस दिन सॉय 18:28 से 20:22 तक के समय में अमावस्या तिथि अंतर्गत वृष लग्न तथा शुभ, अमृत तथा चर का चौघडिया का शुभ योग बना है।

स्थिर लग्न के मुहूर्त में महालक्ष्मी पूजन करने से धन-धान्य स्थिर रहता है। इस मुहूर्त में दीपदान, गणपति सहित महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बही-खाता पूजन तथा धर्मस्थलों में और अपने घर में दीपदान प्रज्जवलित करना चाहिये।

दीपावली पूजन तथा इस रात्रि में की जाने वाली विशेष साधनाओं का विस्तार पूर्वक विवरण जानने के लिये देखें गुरूजी द्वारा प्रकाशित अॉनलाईन ज्योतिषीय मासिक पत्रिका aapkabhavishya यह पत्रिका http://www.shukracharya.com पर नि:शुल्क उपलब्ध है।

इस के अतिरिक्त AapKaBhavishya.in पर भी गुरूजी (डा. आर.बी.धवन) के ज्योतिषीय लेख आप पढ़ सकते हैं।

Deepawli Tantra (आकर्षण-सम्मोहन कवच)

हर महिला चाहती है की उस में “आकर्षण-सम्मोहन” तथा “वशीकरण” की एेसी शक्ति हो जिससे वह सुन्दरता तो दिखाई दे ही साथ ही अपने पति को किसी अन्य स्त्री के मोहजाल में फंसने से भी रोक सकती हो। यह सब तभी सम्भव है, जब वह महिला स्वयं सुन्दर आकर्षक व स्वास्थ्य हो। साथ में वह आवश्यक होने पर ‘वशीकरण’ का प्रयोग भी कर सके। क्योंकि जब किसी महिला में आकर्षण का आभाव होता है, तब ही उसके पति का किसी अन्य सुन्दरी की ओर झुकाव पैदा होता है। अर्थात तभी उसके पति किसी सुन्दरी के मोहजाल में उलझ सकते हैं। क्योंकि एक व्यवस्थित व संतुलित शरीर वाली स्त्री किसी सामान्य पुरूष को सहज ही आकर्षित कर सकती है। यह बात दूसरी है की कभी-कभी सांवली सलोनी नैन नक्श वाली व्यवस्थित स्त्री का मुस्कुराता चेहरा भी पुरूषों को आकर्षित करता है।
तंत्र-शास्त्रों में ऐसे प्रयोग भी मिलते हैं, जिन्हें करने से स्त्रीयां स्वयं में “आकर्षण-सम्मोहन” की शक्ति का विकास कर सकती हैं, और हीनभावना को निकालकर अपने पति के साथ सुखपूर्वक रह सकती हैं।
इसके लिये है- “आकर्षण-सम्मोहन कवच”। इस कवच की रचना दीपावली की रात्रि में की जाती है। अर्थात दीपावली की रात्रि में “गोपनीय तंत्र प्रयोग” द्वारा ही सिद्ध किया जाता है। यह कवच उन स्त्रीयों के लिये प्रयोग करने योग्य है, जो किसी प्रकार से पति की प्रेमिका से परेशान हैं। जो वह प्रेमिका या मित्र बनकर उनके पति पर डोरे डालती हैं, और पति का झुकाव निरंतर उस महिला की ओर आवश्यकता से अधिक हो गया है।
“आकर्षण-सम्मोहन कवच” का निर्माण करने के लिये गुरूजी ‘डा. आर. बी. धवन ‘ विशेष मुहूर्त का चुनाव करते हैं। इस की विधि तथा प्रयोग गोपनीय रखे जाते हैं। इस लिये “गोपनीय तंत्र प्रयोग” (तांत्रिक मंत्रो) द्वारा ही इस कवच को सिद्ध किया जाता है, यह कार्य गुरूजी स्वयं करते हैं। यह कवच सिद्ध करने के पश्चात सोने के सुन्दर लॉकेट में छिपाकर रखा होता है, और एक वर्ष तक महिला को अपने गले में धारण करना होता है।

“आकर्षण-सम्मोहन कवच” के लिये गुरूजी से सम्पर्क करें।

इसके अतिरिक्त डा. आर. बी. धवन (गुरूजी) द्वारा सम्पादित “दीपावली तंत्र-मंत्र विशेषांक” आप का भविष्य (मासिक ज्योतिषीय पत्रिका) की free membership भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिये http://www.shukracharya.com पर लॉगिन करें।

टोटके (Totke) आर्थिक संकट दूरी करने के लिये

यदि आप अपना घर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, कोशिश करने के बाद भी घर नहीं बना पा रहे, और आपके सभी प्रयत्न असफल हो रहे हैं, तो हर शुक्रवार को नियम से किसी भूखे व्यक्ति को भरपेट भोजन करवायें और रविवार के दिन गाय को गुड़ खिलायें। एेसा करने से अचल सम्पत्ति की प्राप्ति या कोई पैत्रिक सम्पत्ति प्राप्त होगी।

Dr.R.B.Dhawan द्वारा Uncategorized में प्रकाशित किया गया

भाग्योदय

भाग्योदय के लिये यह उपाय अवश्य आजमाईये- कुण्डली के ग्रह कितने भी प्रतिकूल हों, जिन्हें अपने भाग्योदय की प्रबल इच्छा हो, वह इन नियमों का सदा पालन करें तो, उसके बुरे दिन भी भाग जायेंगे।
1. नित्य सूर्योदय से कम-से-कम आधा घंटा पूर्व उठना चाहिए।
2. प्रातः उठने के समय बिस्तर पर आँख खुलते ही, जिस ओर की नासिका छिद्र से श्वांस चल रही हो, उस ओर का हाथ मुखपर फेर कर बैठें। इसके बाद उसी ओर का पैर पहले भूमि पर रख कर बिस्तर से नीचे उतरें।
3. माता-पिता/सास-श्वसुर के नित्य प्रातः चरण स्पर्श करें।
इन नियमों का सदा श्रद्धा पूर्वक पालन करने से हर प्रकार से ग्रहदोष स्वंय दूर होते हैं।

r. b. dhawan

जब मैंने पहली पुस्तक लिखी- “गुरूजी के टोटके” (यह मेरी पहली पुस्तक थी) जो मैंने 2005 में लिखी थी। इस पुस्तक के लिये मैने लेख “छोटे-छोटे कामयाब टोटके इक्ट्ठे करने थे, परंतु इसके लिये मुझे तलाश थी कम से कम 60 से 100 वर्ष पुरानें हिन्दी के पंचांगों की। मुझे पूरा यकीन था एैसे लेख “टोटके” पुराने पंचांगों में बेहतरीन मिल सकते हैं, परंतु इतने पुराने जमाने के पंचांग मिलेंगे कहां ? एक दिन अचानक मुझे एक कबाड़ी के गोदाम की ओर देखने से कुछ बहुत पुराने परंतु जिल्दों में सहेजे हुये पुराने पंचांगों के बहुत सारे अंक मिल गये। बस मन की इच्छा जैसे पूर्ण हो गई, कबाड़ी वाले ने बाद में बताया की एक विद्वान बुजुर्ग ब्राह्मण की मृत्यु के बाद उसकी पूरी लायब्रेरी को वह कबाड़ी खरीद लाया था। बस मेरे लिये तो वह एक खजाना साबित हुआ। एक वर्ष की मेहनत के बाद “गुरूजी के टोटके” 1500 शानदार तथा हर समस्या के लिये एक-से-एक लाजवाब टोटकों से युक्त यह पुस्तक छपकर तैयार थी।
अब इस पुस्तक को शानदार लुक मैं देना चाहता था। अनेक सुंदर जिल्दों में से लाल रंग की जिल्द पर गोल्डन कलर से पुस्तक का नाम लिखवाने के बाद तो जैसे इस पुस्तक को चार चांद लग गये हों। पुस्तक के बाजार मे उतारते ही भारी सफलता मिली। हाथों-हाथ 1000 पुस्तकें बिक गई, खूब ख्याति भी मिली, और उपयोगी ज्योतिषीय विषयों पर पुस्तकें लिखने की प्रेरणा भी मिली, आज 10 वर्ष के बाद ईश्वर कृपा से 10 अन्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, पाठकों से बहुत प्यार मिल रहा है।
मेरी सभी ज्योतिष और उपाय की पुस्तकें http://www.shukracharya.com पर उपलब्ध हैं।

महान व्यक्ति

आप भी महान व्यक्तित्व के स्वामी बन सकते हैं, यदि पं. श्री राम शर्मा आचार्य जी के इन सिद्धांतों को अपनी जीवनशैली में उतार लें-
1. ईश्वर को सर्वव्यापी व न्यायकारी मानकर उसके अनुशासन को स्वीकार करें।
2. अपने शरीर को परमात्मा का मंदिर मानकर (क्योंकि परमात्मा के अंश “आत्मा” का आपके शरीर में भी निवास है।) आत्मसंयम, और नियमितता द्वारा अपने शरीर की रोगों और बुराईयों से रक्षा करें।
3. मन को कुविचारों और दुर्भावनाओं से बचाये रखने के लिये संस्कारी लोगों की संगति करें।
4. इन्द्रियों का नियंत्रण, अर्थ संयम, समय संयम और विचार संयम का सदा अभ्यास करें।
5. मर्यादाओं का पालन करें, वर्जनाओं से बचें तथा समाजनिष्ठ बनें।
6. अनिति से प्राप्त उपलब्धियों और सफलताओं की उपेक्षा करें।
7. रूढ़िवादी परम्पराओं की तुलना में विवेक से फैसले लें।
8. मनुष्य का मूल्यांकन उसकी सफलताओं और योग्यताओं से न करके, उसके सद्द्विचारों और सत्कर्मों को महत्व दें।
9. “मनुष्य अपने अच्छे-बुरे कर्मो के द्वारा अपने भाग्य का निर्माण स्वयं ही करता है” इस विश्वास पर चलते हुये आजीवन सद्कर्म करते चलें।

नींद के लिये मंत्र

अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो महाबलः।
कपिलो मुनिरास्तीकः पंचैते सुखशायिनः।।
निद्रा नहीं आती हो तो, सोते समय हाथ-पैर धोकर इस मंत्र का उच्चारण करते रहें, सुखद निद्रा आयेगी।

चोरी नहीं होगी

“तिस्त्रो भार्याः कफल्लस्य दाहिनी मोहिनी सती।
तासां स्मरणमात्रेण चौरो गच्छति निष्फलः।।
कफल्ल कफल्ल कफल्ल।
रात्रि में इस मंत्र को बोलकर तीन बार ताली बजाकर सोयें। इससे चोरी नहीं होगी। यदि चोर आयेगा भी तो उसे खाली लौटना पड़ेगा।

असाध्य रोग निवारण मंत्र

“अच्युताय नमः, अनन्ताय नमः, गोविन्दाय नमः।
इस मंत्र का 40 दिन श्रद्धापूर्वक जप करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। (यह सफल प्रयोग है।)