भाग्योदय

भाग्योदय के लिये यह उपाय अवश्य आजमाईये- कुण्डली के ग्रह कितने भी प्रतिकूल हों, जिन्हें अपने भाग्योदय की प्रबल इच्छा हो, वह इन नियमों का सदा पालन करें तो, उसके बुरे दिन भी भाग जायेंगे।
1. नित्य सूर्योदय से कम-से-कम आधा घंटा पूर्व उठना चाहिए।
2. प्रातः उठने के समय बिस्तर पर आँख खुलते ही, जिस ओर की नासिका छिद्र से श्वांस चल रही हो, उस ओर का हाथ मुखपर फेर कर बैठें। इसके बाद उसी ओर का पैर पहले भूमि पर रख कर बिस्तर से नीचे उतरें।
3. माता-पिता/सास-श्वसुर के नित्य प्रातः चरण स्पर्श करें।
इन नियमों का सदा श्रद्धा पूर्वक पालन करने से हर प्रकार से ग्रहदोष स्वंय दूर होते हैं।

r. b. dhawan

जब मैंने पहली पुस्तक लिखी- “गुरूजी के टोटके” (यह मेरी पहली पुस्तक थी) जो मैंने 2005 में लिखी थी। इस पुस्तक के लिये मैने लेख “छोटे-छोटे कामयाब टोटके इक्ट्ठे करने थे, परंतु इसके लिये मुझे तलाश थी कम से कम 60 से 100 वर्ष पुरानें हिन्दी के पंचांगों की। मुझे पूरा यकीन था एैसे लेख “टोटके” पुराने पंचांगों में बेहतरीन मिल सकते हैं, परंतु इतने पुराने जमाने के पंचांग मिलेंगे कहां ? एक दिन अचानक मुझे एक कबाड़ी के गोदाम की ओर देखने से कुछ बहुत पुराने परंतु जिल्दों में सहेजे हुये पुराने पंचांगों के बहुत सारे अंक मिल गये। बस मन की इच्छा जैसे पूर्ण हो गई, कबाड़ी वाले ने बाद में बताया की एक विद्वान बुजुर्ग ब्राह्मण की मृत्यु के बाद उसकी पूरी लायब्रेरी को वह कबाड़ी खरीद लाया था। बस मेरे लिये तो वह एक खजाना साबित हुआ। एक वर्ष की मेहनत के बाद “गुरूजी के टोटके” 1500 शानदार तथा हर समस्या के लिये एक-से-एक लाजवाब टोटकों से युक्त यह पुस्तक छपकर तैयार थी।
अब इस पुस्तक को शानदार लुक मैं देना चाहता था। अनेक सुंदर जिल्दों में से लाल रंग की जिल्द पर गोल्डन कलर से पुस्तक का नाम लिखवाने के बाद तो जैसे इस पुस्तक को चार चांद लग गये हों। पुस्तक के बाजार मे उतारते ही भारी सफलता मिली। हाथों-हाथ 1000 पुस्तकें बिक गई, खूब ख्याति भी मिली, और उपयोगी ज्योतिषीय विषयों पर पुस्तकें लिखने की प्रेरणा भी मिली, आज 10 वर्ष के बाद ईश्वर कृपा से 10 अन्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, पाठकों से बहुत प्यार मिल रहा है।
मेरी सभी ज्योतिष और उपाय की पुस्तकें http://www.shukracharya.com पर उपलब्ध हैं।

महान व्यक्ति

आप भी महान व्यक्तित्व के स्वामी बन सकते हैं, यदि पं. श्री राम शर्मा आचार्य जी के इन सिद्धांतों को अपनी जीवनशैली में उतार लें-
1. ईश्वर को सर्वव्यापी व न्यायकारी मानकर उसके अनुशासन को स्वीकार करें।
2. अपने शरीर को परमात्मा का मंदिर मानकर (क्योंकि परमात्मा के अंश “आत्मा” का आपके शरीर में भी निवास है।) आत्मसंयम, और नियमितता द्वारा अपने शरीर की रोगों और बुराईयों से रक्षा करें।
3. मन को कुविचारों और दुर्भावनाओं से बचाये रखने के लिये संस्कारी लोगों की संगति करें।
4. इन्द्रियों का नियंत्रण, अर्थ संयम, समय संयम और विचार संयम का सदा अभ्यास करें।
5. मर्यादाओं का पालन करें, वर्जनाओं से बचें तथा समाजनिष्ठ बनें।
6. अनिति से प्राप्त उपलब्धियों और सफलताओं की उपेक्षा करें।
7. रूढ़िवादी परम्पराओं की तुलना में विवेक से फैसले लें।
8. मनुष्य का मूल्यांकन उसकी सफलताओं और योग्यताओं से न करके, उसके सद्द्विचारों और सत्कर्मों को महत्व दें।
9. “मनुष्य अपने अच्छे-बुरे कर्मो के द्वारा अपने भाग्य का निर्माण स्वयं ही करता है” इस विश्वास पर चलते हुये आजीवन सद्कर्म करते चलें।

नींद के लिये मंत्र

अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो महाबलः।
कपिलो मुनिरास्तीकः पंचैते सुखशायिनः।।
निद्रा नहीं आती हो तो, सोते समय हाथ-पैर धोकर इस मंत्र का उच्चारण करते रहें, सुखद निद्रा आयेगी।

चोरी नहीं होगी

“तिस्त्रो भार्याः कफल्लस्य दाहिनी मोहिनी सती।
तासां स्मरणमात्रेण चौरो गच्छति निष्फलः।।
कफल्ल कफल्ल कफल्ल।
रात्रि में इस मंत्र को बोलकर तीन बार ताली बजाकर सोयें। इससे चोरी नहीं होगी। यदि चोर आयेगा भी तो उसे खाली लौटना पड़ेगा।

असाध्य रोग निवारण मंत्र

“अच्युताय नमः, अनन्ताय नमः, गोविन्दाय नमः।
इस मंत्र का 40 दिन श्रद्धापूर्वक जप करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। (यह सफल प्रयोग है।)

प्रेमी-प्रेमिका में झगडा क्यों ? dispute in lov relationship

प्रेमी-प्रेमिका में झगडे क्यों होते हैं? आईये इसका कारण ज्योतिष शास्त्र से जानते हैं-
अापकी जन्मकुण्डली में प्रेमी का स्थान पाँचवां होता है, आपका अपना स्थान प्रथम स्थान है। अच्छी रिलेशनशिप तभी रह सकती है जब आपके प्रथम स्थान के स्वामी ग्रह और आपकी कुण्डली से पाँचवे स्थान के स्वामी ग्रह मित्र होंगे।
यह तो हुई साधारण बात, अब यह भी देखना होगा की आपकी रिलेशनशिप से किसी दूसरे का हाजमा तो खराब नहीं हो रहा ? (रिलेशनशिप से प्राब्लम) कहीं वह गुप्त दुश्मनी तो नहीं निभा रहा ? यह पता चलेगा आपकी कुण्डली के पंचमेश की सेहत देखने से! पंचमेश की सेहत खराब करने के लिये कुण्डली के षष्ठेश या अष्ठमेश जिम्मेदार हो सकते हैं, अर्थात् पंचमेश षष्ठ या अष्ठम में नहीं होना चाहिए अथवा षष्ठेश या अष्ठमेश के साथ नहीं होना चाहिए या फिर षष्ठेश या अष्ठमेश पंचम में नहीं होना चाहिए।
यह तो हुई बड़ी वजह, इसके अतिरिक्त एेसा भी हो सकता है की आपका कोई सगा सम्बंधी ही इस खेल को बिगाड़ने में लगा हो।
इसके लिये दूसरे कुछ ग्रहों और उनकी दशाओं को भी देखना होगा। यह सब तो एक बहुत अनुभवी ज्योतिषी ही आपको बतायेगा। इस प्राब्लम का हल भी वही करवा सकता है। परंतु ज्योतिषी नया नया बना है अर्थात् 5—7 वर्ष की ही प्रेक्टिस है, तो उससे एेसी आशा नहीं कीजियेगा।
गुरूजी (डा. आर. बी. धवन) से भी समय लेकर मिल सकते हैं। गुरूजी विख्यात तो हैं ही, साथ ही लगभग 1990 से ज्योतिषीय मार्गदर्शन दे रहे हैं।

सरल वशीकरण, Easy Vashikaran

वशीकरण vashikaran एक ‘तंत्र प्रयोग’ है, परंतु कभी-कभी एेसा प्रयोग करना जरूरी हो जाता है।
यहां तंत्र का एक सरल vashikaran ‘वशीकरण प्रयोग’ दे रहा हूँ, यह प्रयोग बहुत प्रभावशाली है, इस प्रयोग का अन्य ‘तांत्रिक प्रयोग’ की तरह कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है, परंतु यह सफल तभी होता है जब इस ‘तंत्र प्रयोग’ का नाजायज इस्तेमाल नहीं किया जाये।
सरल वशीकरण Easy vashikaran – जब कोई अधिकारी, मालिक, रिश्ते में सम्बंधी अथवा पति या पत्नी नाराज हो जायें, तब उन्हें मनाना जरूरी हो जाता है। एेसे में कठिनाइयां अधिक हो रही हों, तब यह ‘तंत्र प्रयोग’ प्रयोग जायज है।
प्रयोग व सामग्री-
एक पीपल का पत्ता, अनार की कलम, लाल चंदन की लकड़ी, एक थाली, एक आचमनी या चम्मच, और एक तांबे का लोटा।
रात्रि में पवित्र भाव से एक शुद्ध आसन पर उत्तराभिमुख होकर बैठें, सामने एक थाली में पीपल के पत्ते पर लाल चंदन की स्याही से अनार की कलम द्वारा जिसका वशीकरण करना हो, उसका नाम लिखकर पत्ता उल्टा करके रख दें। लोटा जो जल से भरा हो, उसमें से एक-एक आचमनी या चम्मच पानी लेकर पीपल के पत्ते पर एक-एक मंत्र का उच्चारण करते हुये डालते रहें, 108 बार जल मंत्र पढ़ते हुये डालना है। मंत्र पाठ के समय दुर्गा वेशधारी माता गायत्री का ध्यान करें।
साधारण अवस्था में यह प्रयोग एक सप्ताह (सात दिन) में ही अपना प्रभाव दिखा देता है, परंतु यदि समस्या गहरी हो तो, अधिक दिन भी करना पड़ता है।
मंत्र- ॐ क्लीं क्लीं क्लीं क्लीं क्लीं भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

tantrik sidhiyan, तांत्रिक सिद्धियाँ

किसी भी कार्य को करने की कम से कम दो कार्य प्रणाली होती हैं, एक सीधे रास्ते से और दूसरे शार्टकट रास्ते से कोई भी कार्य सम्पन्न किया जा सकता है। सीधे रास्ते चलने में समय बेशक अधिक लगता है, थकावट भी होगी परंतु खतरा कम होगा। और शार्टकट रास्ते में खतरे अधिक होंगे, क्योंकि वे अनजान व ऊबड-खाबड रास्ता होगा, परंतु ठीकठाक रहा तो समय भी बचेगा और थकावट भी कम होगी।
इसको एेसे भी समझ सकते हैं- हवा के रूख को देख कर हवा के साथ चलना, और हवा के विपरीत चलना परंतु एक निश्चित मार्ग पर ही चलना। इन दोनो में हवा के साथ चलना सरल प्रतीत होता है, तथा हवा के विपरीत चलना संघर्ष व कठिनाइयों से भरा होता है।
शार्टकट तथा हवा के रूख को देख कर उसके साथ बहना तांत्रिक विधि से किसी कार्य को संयोजित करने जैसा हुआ, पर हवा का बहाव (तांत्रिक विधि से किया कार्य) आपका बैलेंस बिगाढ सकता है।
तांत्रिक किसी कार्य को शीघ्र व चमत्कारी ढंग से कर तो लेता है, परंतु उस कार्य का जीवनकाल भी कम ही होता है। इसके विपरीत सात्विक विधि से सम्पन्न किया गया कार्य खर्चीला तथा समय अधिक लगने के कारण थकाऊ तो होता है, परंतु इसका जीवनकाल कहीं अधिक और टिकाऊ होता है।
— देखें गुरूजी की साधनाएँ–
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जड़ बुद्धि वाला भी होगा कुशाग्र बुद्धि

छह मुख वाले 12 असली रूद्राक्ष लें, सभी के मुख एक दिशा में रख कर ब्रेसलेट (कंगना) बनवा लीजिये, सीधे हाथ की कलाई में शुक्ल पक्ष के सोमवार को बांध लीजिये।
पाठ याद न रहना, शिक्षा पूरी होने में रूकावट आना, या कोई भी भाषा या कला सीखने में रूकावटें आ रही हों तो, उन्हें दूर करने में यह प्रयोग रामबाण की तरह कार्य करेगा।

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