bad-luck

संसार में जितने भी योगी, सन्यासी, या उच्च कोटि के साधक हुये हैं, उनमें से किसी को पहली बार ही साधना में सफलता मिली हो, यह आवश्यक नहीं। परंतु उनके जीवन का लक्ष्य एक ही था, कि हमें हर हाल में इस क्षेत्र में आगे बढ़ना है, और पूर्णता प्राप्त करनी है, क्योकि यह साधना का मार्ग अपने आप में अलौकिक और दिव्य होता है, इस रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति अपने परिवार, समाज, शहर, देश और फिर पूरे विश्व में सम्मानित होता चला जाता है, लोग उसका आदर और सम्मान करते हैं। साधनायें अनेक प्रकार की होती हैं, कुछ साधनायें आध्यात्मिक उन्नति के लिये, कुछ भौतिक या आर्थिक उन्नति के लिये तथा कुछ विश्व-कल्याण के लिये होती हैं। इस साधनाओं के लिये देश-काल- परिस्थिति अनुसार साधना पद्धतियाँ और मुहूर्त भी अलग-अलग होते हैं।

Dipawali sadhna for Lakshmi

Goddess Lakshmi

आर्थिक उन्नति के लिये की जाने वाली साधनाओं में दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने वाली एक साधना का उल्लेख यहाँ इस लेख में किया जा रहा है, जो की सम्पूर्ण पद्धति सहित है- जैसा की सभी जाने हैं, आनेवाले दिनों में दीपावली का पर्व साधनाओं और सिद्धियों के लिये एक अनुपम अवसर है। इस वर्ष दीपावली का यह महापर्व 13 नवम्बर, मंगलवार के दिन है, इस दिन स्वाती नक्षत्र 20 घटि 30 पल तक है। यही वह अवसर है जब दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने वाली साधना सफल हो सकती हैं। वैसे तो इस दिन किसी भी प्रकार की दुर्लभ या अतिदुर्लभ साधना सम्पन्न की जा सकती है, परंतु दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की साधना करने वाले साधकों के लिये यह एक विशेष अवसर है, पर्वकाल के इस दिन साधना का मनोवांछित फल प्राप्त होता है। इस दिन यह साधना सम्पन्न करने का अर्थ है। साधना में पूर्ण सिद्धि की गारंटी! जो साधक तो हैं परंतु ऐसे अवसर पर पीछे रह जाते हैं, जो ऐसे अवसर का लाभ नहीं उठा पाते; उनके लिये तो यह एक स्वर्णिम अवसर है। और फिर यह साधना तो उन लोगों के लिये गुरूजी ने विशेष रूप से प्रकाशित की है, जिनका पीछा दुर्भाग्य अनेक वर्षों से नही छोड रहा है।
यदि किसी दुर्भाग्य से पीड़ित व्यक्ति को जीवन में ऐसा अवसर प्राप्त हो तो उस व्यक्ति को ऐसे क्षण लपक कर पकड़ लेने चाहियें! उसका उपयोग करना चाहिये, और ऐसे क्षणों में इस प्रकार की साधना संपन्न कर मनोवांछित सिद्धि प्राप्त कर लेनी चाहिये। विशेष साधनायें किसी एक विशेष वर्ग या समुदाय के लिये नहीं होती। साधना का उपयोग तो सम्पूर्ण मानव जाति तथा सम्पूर्ण विश्व के लिये है, कोई भी साधक किसी भी जाति, धर्म या स्थान विशेष से सम्बंध रखता हो वह किसी भी प्रकार की साधना सम्पन्न कर सकता है, मनुष्य यदि प्रयास करे तो वह संपूर्ण विश्व और आगे बढ़कर पूरे ब्रह्माण्ड को अपने द्वारा संचालित कर सकता है। इसलिये जो सही अर्थो में ऊँचाईयों पर पहुँचना चाहते हैं, वे साधना-काल में आने वाली छोटी-मोटी कठिनाईयों अथवा घटनाओं से हताश या निराश नही होते, और फिर यह बाधायें और अड़चने अब और रहने वाली तो हैं नहीं। इस साधना की सिद्धि करने के पश्चात् तो दुर्भाग्य सौभाग्य में अवश्य बदने वाला ही है।

कैसे सम्पन्न करें दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने वाली यह साधना?-
कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन को ही समृद्धि का पर्व दीपावली कहा जाता है। परंतु दीपावली के दिन यदि स्वाती नक्षत्र का योग हो तो कुछ विशेष साधनाओं में सिद्धि अवश्य मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस दिन सूर्य अपनी नीच राशि तुला में विचरण करता हो तथा इसी दिन इस सूर्य को चन्द्रमा का साथ मिले अर्थात् यह दोनो (ग्रहों का राजा सूर्य तथा ग्रहों में रानी चन्दमा) शुक्र की राशि तुला में एक ही अंश में हों ऐसे ब्रह्माण्ड में धरती पर एक ऐसा अद्भुत, अलौकिक वातावरण बनता है, जो कि समृद्धि प्रदायक साधनाओं के लिये अनुकूल मुहूर्त होता है। ऐसा समय साधक के लिये सौभाग्य प्रदायक समय होता है। इस मुहूर्त में कोई भी साधना सम्पन्न करने पर हजार गुना फल प्राप्त होता है। और फिर यदि इस समय स्वाती नक्षत्र का योग हो तो यह हजार गुना फल भी लाख गुना हो जाता है। अर्थात् यदि ऐसे मुहूर्त में किसी विशेष मंत्र का जप किया जाता है तब उस मंत्र का फल भी लाख गुना प्राप्त होगा। यही कारण है कि किसी विशेष प्रयोजन के लिये यदि साधना करनी हो तो साधक वर्ग ऐसे ही विशेष मुहूर्त की प्रतीक्षा वर्षों तक भी करते हैं। क्योकि इस मुहूर्त में योग्य गुरू के निर्देशानुसार यदि सौभाग्य प्रदायक कोई भी साधना सम्पन्न की जाती है तब सफलता अवश्य प्राप्त होती है। शर्त यही है कि साधना के विधि-विधान का पूरा ध्यान रखा जाये।
इस वर्ष 2012 में यह अवसर नवम्बर माह में 13 नवम्बर को प्राप्त हो रहा है। इस दिन मंगलवार है, स्वाती नक्षत्र 20 घटि 30 पल ( सूर्योदय से 8 घंटे 12 मिनट) तक है। दिल्ली व एन. सी. आर. में सूर्योदय- 06:55 पर होगा, इस लिये यहाँ के लिये स्वाती नक्षत्र प्रातः 6:55 से मध्याहन 03:07 स्टै. टा. 15:07 तक रहेगा। (अन्य शहरों के निवासी कार्यालय से सूर्योदय के समय की जानकरी प्राप्त कर सकते हैं।) गुरूजी की राय में इसी समय यह विशेष मुहूर्तराज है, अतः साधक वर्ग को यह सलाह दी जाती है कि- इस समय का भरपूर लाभ सौभाग्यशाली साधक उवश्य उठायें।

कैसे साधना संपन्न करें-
आप इस अवसर पर यह स्वर्ण के समान सौभाग्य प्रदायिनी साधना का प्रयोग आरम्भ करने के लिये इस दिन प्रातः सूर्योदय से 1-2 घंटे पूर्व ही बिस्तर से उठ जायें, प्रातः उठते ही सर्वप्रथम घरती माता को प्रणाम करें, तत्पश्चात् नित्कर्म से निवृत होकर स्नानादि करें और सामान्य पूजा सामग्री तथा साधना की विशेष सामग्री जो इस प्रयोग के लिये पहले से ही तैयार रहनी चाहिये को लाकर साधना कक्ष या साधना स्थान में एक शुद्ध थाली में रखें।
साधना व पूजा सामग्री के साथ एक लोटा (तांबे का) शुद्ध जल भरकर रखें, तथा एक हाथ लम्बा एक हाथ चौड़ा पीले रंग का रेशमी वस्त्र जिसे चार तह लगाकर सामने एक लकड़ी की चौकी पर बिछा देना है। अब लोटे से थोड़ा जल आस-पास छिड़क लें। उसके बाद शुभ मुहूर्त- जो कि सूर्योदय से ही आरम्भ हो जायेगा और सूर्योदय से लेकर 8 घंटे 12 मिनट तक रहेगा। (इसी मुहूर्त का प्रयोग करें) इस मुहूर्त में पूजा स्थान में बैठ जायें, एक थाली में कुंकुम से स्वास्तिक बनायें तथा लक्ष्मी जी का बीज मंत्र श्रीं लिखें। पूजा की थाली में पूजा सामग्री तथा श्री गणेश लक्ष्मी का रंगीन चित्र स्थापित करें, पीले गैंदे के फूल, थोड़े अक्षत् (साबुत चावल) 5 प्रकार के ताजे फल, रोली, कलावा, गुढ, बताशा खील तथा 5 साबुत सुपारी रखें।

विख्यात् ज्योतिषाचर्य – Dr.R.B.Dhawan
विशेष साधना सामग्री में-
गुरूजी द्वारा सिद्ध स्वर्णरेखा यंत्र कवच जो कि पहले से ही गुरूजी के कार्यालय से प्राप्त कर लिया जाये, और इसके साथ 8 सिद्ध हकीक रत्न भी रख दें, जो कि अष्ठलक्ष्मी के प्रतीक रूप हैं। और फिर वहीं उत्तर दिशा की ओर मुख करके रेशमी लाल आसन पर स्वयं तथा यदि शादि-शुदा हैं तो गृहलक्ष्मी (पत्नी) के साथ बैठें। शुद्ध तेल (तिल का तेल) का दीपक लगा लें, सामने रखें ताम्र पात्र (लोटे) से हाथ में थोड़ा जल लेकर अपने तथा पत्नी के शरीर पर छिडकें, कमर सीधी रखें, शांत मन से गणपति का ध्यान कर माँ लक्ष्मी के दरबार में माँ के समक्ष स्वयं को महसूस करते हुये मन-ही-मन दुर्भाग्य तथा धनाभाव को दूर करने की प्रार्थना करें। श्री गणेश लक्ष्मी के चित्र अथवा प्रतिमा पर जल का छींटा देकर रोली से तिलक करें और पुष्प, अक्षत्, गुढ़ बताशा तथा सुपारी चढ़ावें। गणेश-लक्ष्मी की पूजा के समय इस मंत्र का उच्चारण करते रहें-

या देवी सर्वभूतेशु समृद्धि रूपेण संस्थिताः।
नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमोनमः।।

पूजा के उपरांत लाल रंग के आसन पर बैठे-बैठे सिद्ध हकीक माला से स्वर्ण रेखा अष्टलक्ष्मी मंत्र की इक्यावन माला जप करें। याद रहे जप करते समय सामने सिद्ध स्वर्णरेखा यंत्र कवच अवश्य स्थापित होना चाहिये, और शुद्ध तेल (तिल का तेल) का दीपक लगा रहना चाहिए।

स्वर्ण रेखा अष्ठलक्ष्मी मंत्र- ऊँ ऐं ऐं श्रीं श्रीं श्रीं हृीं हृीं फट्।
मंत्र जप समाप्ति के बाद वह सिद्ध स्वर्णरेखा यंत्र कवच पीले धागे में पिरोकर गले में धारण कर लें और अष्ठलक्ष्मी प्रतीक 8 हकीक रत्न को पीले रेशमी वस्त्र में बांधकर घर में उत्तर दिशा की किसी संदूक सा तिजोरी अथवा अलमारी में रख दें। जिस हकीक माला से मंत्र जप किया था, वह माला और अन्य पूजा सामग्री तीसरे दिन अर्थात् बृहस्पति वार की शाम को जल में विसर्जित कर दें अथवा भूमि में दबा दें। इस प्रकार यह  दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने वाली साधना पूर्ण होती है और उसी दिन से साधक तथा उसके परिवार का दुर्भाग्य सौभाग्य में बदलने लगेगा।
गत वर्ष गुरूजी ने यह प्रयोग अपने विशेष शिष्यों को अपने स्थान पर सम्पन्न करवाया था। उन सभी साधकों में से 85 प्रतीशत को चमत्कारी लाभ प्राप्त हुआ है। शेष 15 प्रतीशत साधकों को साधारण लाभ हुआ है। इस साधना को सम्पन्न करने के पश्चात् गुरूजी के शिष्य या साधक एक महीने के भीतर जो कुछ भी परिवर्तन महसूस करेंगे, वह आश्चर्य जनक और अद्भुत होगा, उनके जीवन में दुःख दरिद्रता और भय की समाप्ति तो होगी ही जीवन में निरन्तर हर दृष्टि से उन्नति आरम्भ हो जायेगी।
शिष्य, पाठकों और साधकों के लिए यह सुविधा प्रदान की जाती है, कि वे पत्रिका कार्यालय से विशेष साधना सामग्री पैकिट जिसमें- एक सिद्ध स्वर्णरेखा यंत्र कवच एक सिद्ध हकीक माला तथा 8 अष्ठलक्ष्मी प्रतीक हकीक रत्न होंगे। प्राप्त करने के लिये शीघ्र सम्पर्क कर लें, क्योकि यह विशेष साधना सामग्री पैकिट सीमित मात्रा में ही उपलब्ध होंगे। इसके लिये न्यौक्षावर राशि 3100/-रू अग्रिम जमा करनी होगी।
कम-से-कम 15-20 दिन पूर्व ही न्यौक्षावर राशि का डी.डी. Shukracharya Astro Pvt. Ltd. के नाम से दिल्ली के लिये बनवाकर पत्रिका कार्यालय के पते पर भेजें, अथवा स्टेट बैंक आफ इंडिया के हमारे कम्पनी के खाते- Shukracharya Astro Pvt. Ltd. खाता नः 31810709561 में कैश जमा करवा कर भी मंगवा सकते हैं।

लेखक विख्यात ज्योतिषाचार्य— Dr.R.B.Dhawan

कार्यालय का पता-
Shukracharya Astro Pvt. Ltd.
F- 265, Gali No 22, Laxmi Nagar, Delhi-110092.
Tel. 011-22455184, 9810143516
Web: shukracharya.com

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