उन्नति

किसी भी छेत्र में निर्बलता का आभाव (ताकतवर होना) ही तो उन्नति है। जब भय की जगह निर्भय होकर आप कठिनाइयों को परास्त करें और अपने परम लक्ष्य की ओर बढ़ते ही चले जायें। जैसे-जैसे आप अपनी संकीर्ण आदतों को बदलकर सांसारिक भोग-वासनाओं से ऊपर उठेंगे, वैसे-वैसे संकीर्णता के दुष्प्रभाव से मुक्त होते जायेंगे। भेद-भाव मिटने लगेगा, प्रतिष्ठा और प्रताप प्रबल होता जायेगा। आपकी आरोहण गति निरापद और सरल होती चली जायेगी। सभी ऊँचे-नीचे स्थान वैसे दिखने लगेंगे जैसे गिरिशिखर से एक विशाल नगर का दृश्य दिखाई देता है। उस समय ऊँचाई-निचाई का भाव समता में बदल जायेगा, और आपकी दृष्टि आगे दिखने वाली सभी प्रकार की सीमाओं को तोड़ती हुई, असीम में विलीन होने के लिये बढ़ती चली जायेगी। इसी प्रकार सभी ओर से शक्ति के सदुपयोग द्वारा आप शक्ति सम्पन्न होकर महानतम पद को प्राप्त होंगे।

लेखक विख्यात ज्योतिषाचार्य— Dr.R.B.Dhawan

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Dr.R.B.Dhawan द्वारा spiritual में प्रकाशित किया गया

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