कुंडली का त्रिक भाव-3

त्रिक यानि 6, 8,12 भाव, और त्रिक 6, 8,12 भाव के स्वामी (वह स्वामी चाहे कोई भी ग्रह हो) यदि इन्ही में किसी भाव 6, 8 या 12वें भाव मे स्थित हो, तो जीवन में अनेक अरिष्ट स्वयं ही नष्ट होते हैं। (1) भाव 6 का स्वामी 6 में- रोग, व कर्ज नहीं होते, होते भी हैं तो नाम मात्र। (2) भाव 6 का स्वामी 8 में- शत्रु होते ही नहीं, होते हैं तो स्वयं ही नष्ट होते हैं। (3) भाव 6 का स्वामी 12 में- जो जातक का शत्रु होगा,  वह दूर होगा व कष्ट में रहेगा। भाव 8 का स्वामी अगली पोस्ट में… ।

लेखक विख्यात ज्योतिषाचार्य— Dr.R.B.Dhawan

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Dr.R.B.Dhawan द्वारा Astrology में प्रकाशित किया गया टैग की गईं

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