नज़र लगना

नज़र लगना होता क्या है, और यह लगती कैसे है ? अक्सर यह प्रश्न हरेक के मन में कभी-न-कभी आता ही है।
इस प्रश्न के उत्तर के लिये अधिक मेहनत नही करनी पडेगी बस थोड़ा इधर-उधर के उदाहरण देखने पढेंगे। आपने दुआ और बददुआ के बारे में तो सुना ही होगा, हो सकता है, इनमें से किसी एक के प्रभाव को भी परखने का मौका मिला हो। जब कोई बेसहारा मजबूर व्यक्ति किसी मुसीबत में अचानक आ फंसता है तो, उसे जानने वाले शुभचिंतक अपने ईश्वर से दुआ मांगते हैं- हे ईश्वर इस वेचारे मजबूर की मदद् करो। इसी प्रकार की दुआ जब बहुत से व्यक्ति या कोई एक-दो लोग सच्चे मन से करते हैं तब उस दुआ का असर अवश्य दिखाई देता है। इसी प्रकार जब किसी के जुल्म बहुत बढ़ जाते हैं तो उसे बददुआ ले ढूबती हैं। कोई दुआ या बददुआ यदि सच्चे ह्रदय से दी जाती है तो वह बेअसर नहीं जाती। इसी प्रकार जब कोई अपना ही हमारी कामयाबी देखकर ईर्ष्या करता है, और मन-ही-मन बददुआ या बुरी कामना एकाग्र होकर करता है, उसका प्रभाव भी तुरंत होता है। जिससे बना-बनाया कार्य बिगढ़ने लगता है, या आगे उसमें बिना कारण रूकावटें पैदा होने लगती हैं या सम्बंधित व्यक्ति सहयोग करना बंद कर देते हैं, इसे कहते हैं- नज़र लगना। दरअसल नज़र लगाना उन व्यक्तियों के द्वारा होता है जिनकी इच्छाशक्ति तो बहुत प्रबल होती है, परंतु वे अपनी इस नेगिटिव (एनर्जी)  या नकारात्मक पावर का दुरूपयोग अधिक करते फिरते हैं। इस प्रकार के नकारात्मक प्रभाव कभी-कभी बहुत दुःखदाई बन जाते हैं। एेसे प्रभाव को देखकर यह तो समझ आ जाता है की यह नज़र लगी है। परन्तु कभी-कभी नज़र हटाने के उपाय करते-करते इंसान थक जाता है, वे दुष्ट बार-बार अपने काले मन से करतूत करता ही चला जाता है। इस नज़र दोष को दूर करने तथा कभी एेसी बुरी नजर का प्रभाव ही न हो, इसके लिये गुरूजी (शुक्राचार्य जी) ने मंत्र सिद्ध रक्षा कवच का निर्माण किया है, यह रक्षाकवच अपने कार्य  में बेजोड़ है, इस कवच को जहां यह समस्या हो वहां रख देने मात्र से यह अपना कार्य बखूबी आरम्भ कर देता है। यदि आप में किसी को इस कवच की आवश्यकता हो तो शुक्राचार्य कार्यालय से सम्पर्क कर सकते हैं।

लेखक विख्यात ज्योतिषाचार्य— Dr.R.B.Dhawan

ई-मेल info@shukracharya.com पर या मोः 09810143516

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