Jupiter

संतानसौख्यं वचने पटुत्वं शरीर पुष्टि द्रविणं तनूजा।
ज्ञानं मतिस्तंत्र विचार भूप विनोदवेदार्थ विदोड्.गवीर्य।।
तुरंगसौख्यं स्वगुरूः स्वकर्म सिहासनं गोरथवृद्धप्रयः
चीकराभूषणसत्वमेदो मीमांसतीर्थानि यशः सुरेज्यात्।।

संतान सुख, व्याख्या की कुशलता, शरीर की पुष्टि, धन, ज्ञान, बुद्धि, सिद्धांत शास्त्रों का ज्ञान, वेदार्थ, अपना कर्म-सुख, वृद्ध ब्राह्मण, स्वर्ण-सम्पन्नता, सतोगुण, शरीर की चर्बी, शास्त्रों की मिमांसा, तीर्थ, यश, भाग्य और सम्मान तथा राजकृपा।
यह सभी बृहस्पति ग्रह की कृपा से प्राप्त होते हैं। बृहस्पति राजकृपा कारक ग्रह है, जिस पर बृहस्पति की कृपा दृष्टि होती है, उसकी कुण्डली में हँस योग (राजयोग) होता है।
एेसे खुशनसीब व्यक्ति के लिये अपने हाथ से राज सम्मान को लौटाना बृहस्पति को रूष्ट करना है। बृहस्पति देव जब रूष्ट होते हैं, धीरे-धीरे यह सभी उपलब्धियाँ (राजकृपा) भी लुप्त होती चली जाती हैं। अतः कभी भी राज-सम्मान न लौटायें, यह नसीब वालों को मिलता है।

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