सैक्स और ज्योतिष

Dr.R.B.Dhawan

इस आलेख में कुछ ऐसे ज्योतिषीय योगों का उल्लेख कर रहा हूं, जो किसी जातक की कुंडली में यदि हैं, तो उस योग को बनाने वाले ग्रह जातक को सामान्य से अधिक कामुक sexy होने का संकेत देते हैं –

1. किसी भी जातक की लग्न कुंडली में मंगल+शुक्र की युति काम वासना को उग्र कर देती है, जन्म के ग्रह जन्मजात प्रवृति की ओर इशारा करते हैं, और वह जातक इस के प्रभाव से आजीवन प्रभावित-संचालित होता है। किसी व्यक्ति में इस भावना का प्रतिशत कम हो सकता है, और किसी में ज्यादा हो सकता है। ज्योतिष के विश्लेषण के अनुसार यह पता लगाया जा सकता है की जातक में काम भावना किस मात्रा में विद्यमान है। 

लग्न / लग्नेश :
1. यदि लग्न और बारहवें भाव के स्वामी एक हो कर केंद्र /त्रिकोण में बैठ जाएँ या एक दूसरे से केंद्रवर्ती हो या आपस में स्थान परिवर्तन कर रहे हों तो पर्वत योग का निर्माण होता है । इस योग के चलते जहां व्यक्ति भाग्यशाली , विद्या -प्रिय ,कर्म शील , दानी , यशस्वी , घर जमीन का अधिपति होता है, वहीं अत्यंत कामी और कभी कभी पर स्त्री गमन करने वाला भी होता है ।

2. यदि लग्नेश सप्तम स्थान पर हो, तो ऐसे व्यक्ति की रूचि विपरीत सेक्स के प्रति अधिक होती है । उस व्यक्ति का पूरा चिंतन मनन ,विचार व्यवहार का केंद्र बिंदु उसका प्रिय ही होता है । 

3.तुला राशि में चन्द्रमा और शुक्र की युति जातक की काम वासना को कई गुणा बड़ा देती है । अगर इस युति पर राहु/मंगल की दृष्टि भी तो जातक अपनी वासना की पूर्ति के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। 

4 तुला राशि में चार या अधिक ग्रहों की उपस्थिति भी  is baat का कारण बनती है ।  

5 सप्तम भाव में शुक्र की उपस्थिति जातक को कामुक बना देती है ।
शुक्र के ऊपर मंगल /राहु का प्रभाव जातक को काफी लोगों से शरीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए उकसाता है । 

6.शुक्र/मंगल के साथ युति जातक में काम वासना को काफी बड़ा देती है । 

7 शुक्र मंगल की उपस्थिति 8 /12 भाव में हो तो, जातक कामुक होता है । 

8. कामवासना बढ़ाने में द्वादश भाव के स्वामी का मुख्य रोल होता है अगर इस का स्वामी सप्तम भाव में आए या लग्न में आजाये और वह मुख्यत: शुक्र या मंगल हो, ऐसा जातक स्वभाव से लंपट और  बहुत सारी स्त्रियों से रिश्ता रखता है 4 7 या 12वे में हो, अथवा ईन दोनों ग्रहों का संबंध बन रहा हो तो, यह जातक के अत्यंत कामी sexy होने का संकेत है। ये ग्रह अधिक बलवान हों तो, जातक समय और दिन-रात की मर्यादा भूलकर सदैव सेक्स sex को आतुर रहता है। मंगल जोश है, और शुक्र भोग अतः इन दोनों की युति होने पर अधिकांश कुंडलियों में ये प्रभाव सही पाया गया है। ये बात वैध और अवैध दोनों संबंधो पर लागू होती है। 

9. कुंडली का चतुर्थ भाव सुख का होता है, सातवा भाव गुप्तांग secret part को दर्शाता है और 12वां भाव शय्या सुख…! अतः सप्तमेश और व्ययेश की युति 4, 7 या 12 में हो तो, जातक/जातिका अतिकामुक होते हैं। 

10. जातिका की कुंडली में यदि सप्तम में शुक्र+राहू या चंद्र+राहू हो और 12वें में गुरु हो तो, अधिकतर मामलो में पाया गया है कि शादी के बाद भी अवैध शारीरिक संबंध बनते हैं। तब संभावना और बड़ जाती है यदि वे सरकारी/प्राइवेट नौकरी में हो। 

11. जातक/जातिका की कुंडली में गुरु और शुक्र समसप्तक हो तो भी वे अतिकामुक योग है, और ये योग वैवाहिक जीवन married life के निजी सुखो personal relationship में वृद्धि करता है। जातक के मामले में यदि मंगल और शुक्र समसप्तक हो तो ये योग की सार्थकता सिद्ध होती है। 

12. नपुसंकता में सबसे बड़ा योगदान शनि और बुध का है, अतः यदि ये दोनों ग्रह सप्तम में हैं, या सप्तम पर दृष्टि दे रहे हैं तो, जातक/जातिका सेक्स sex के मामले में नीरस और अयोग्य होते हैं। जातक में उत्तेजना की कमी होती है। यदि 12वे भाव में ये युति हो या इन दोनों ग्रहों का दृष्टि संबंध हो तो, जातक शीघ्रपतन का रोगी होता है। और जतिका के मामले में वे ठंडी होती है। ये स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, यदि राहू 1,7, 8 में हो तो,जातक व्यसन का आदि होकर अपनी जवानी धुएँ में उड़ा देता है। 

13. जातक की कुंडली में यदि सप्तम में राहू+शुक्र हों तो जातक के शुक्राणु sperm तेजहीन होते हैं, और संतान प्राप्ति हेतु बहुत संघर्ष करना होता है। संतान “दिव्यांग” भी पैदा हो सकती है।

14. जातिका की कुंडली में यदि सप्तम में मंगल+राहू हो या इन दोनों का एक साथ दृष्टि संबंध सप्तम में हो तो, जातिका को श्वेतप्रदर और अनियमित माहवारी period का कष्ट होता है। यदि मंगल ज्यादा बलवान हो तो माहवारी period के दौरान बहुत अधिक रक्तश्राव bleeding होता है। 

नोट- ये ज्योतिषीय योग हर मामले में लागू नहीं होते, ज्योतिष में भी कुछ मामले अपवाद होते हैं।
मेरे और लेख देखें :- aapkabhavishya.in तथा astroguruji.in पर।

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