शुभ और अशुभ ग्रह

गुरू या शुक्र अस्त होने पर मांगलिक कार्य वर्जित क्यों हो जाते हैं।

Dr.R.B.Dhawan

(Top Astrologer in Delhi, best Astrologer in Delhi)

शुक्रे चास्तं गते जीवे चन्द्र वास्तमुपागते।
तेषां वृद्धि च बाल्ये च शुभकर्म भयप्रदम्।।

शुक्र नष्टे गुरौ सिंह गुर्वादित्ये मलिम्लुचे।
गृहकर्म व्रतों यात्रा मनसापि न चिन्तयेत।।

अर्थात्:- शुक्र चन्द्र गुरू के अस्त होने में व वृद्धत्वव बलात् में शुभ कार्य करने से भय ही मिलता है। इसी प्रकार सिंह राशि में गुरू का प्रभाव है।

सूर्य सिद्धान्त के अनुसार – सूर्येणास्तम्भन सह अर्थात सूर्य के साथ (निकट के अंशों में आने से) ग्रह अस्त होते हैं। अपनी-अपनी गति से भ्रमण करते हुये ग्रह जब सूर्य के सानिध्य में आते हैं, तब उनका सूर्यकिरणों में छिप जाने के कारण ग्रह दिखाई नहीं देते हैं। इसी को ग्रह का अस्त होना कहते हैं। और जब सूर्य से दूर हट कर दिखलाई देने लगते हैं, तब इसे उदय ग्रह कहा जाता है । ग्रहों का उदय अस्त होना , मनुष्य की दृष्टी से ओझल होना व्यक्त करता है। और गुरू, शुक्र का उदय अस्त होना मंगल कार्य के मुहूर्त की दृष्टी से विशेष महत्व रखता है।

सूर्य के दक्षिणायन होने पर (कर्क संक्रान्ति से धनु संक्रान्ति के अन्त तक) देव प्राण-प्रतिष्ठा, जलाशय-प्रतिष्ठा, विवाह-संस्कार, अग्निहोत्र, ग्रहप्रवेश, मुण्डन, राज्याभिषेक एवं व्रतबंध आदि मांगलिक कार्य वर्जित हैं, अर्थात् शुभकारी नहीं होते।

बाल्यावस्था, अस्तांगत एवं वृद्धावस्था में गुरू और शुक्र के जाने पर तथा केतु के उदय होने पर भी यह मांगलिक कार्य शुभ फल नहीं देते। इस का कारण है- सूर्य मण्डल में शुक्र अस्त हो जाता है, तो तेजहीन हो जाता है। इसी प्रकार गुरू भी तेजहीन हो जाता है। शुक्र या गुरु की ऐसी स्थिति में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिये। क्योंकि शुक्र भोग कारक ग्रह होने से भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति में बाधक होता है, यह भोग प्रदाता ग्रह है, सांसारिक सुख का ग्रह है, एवं दैहिक भोगविलास और लग्ज़री वस्तुओं का विवाह उपरांत आभाव अच्छा नहीं। ऐसे में शुक्र ग्रह के अस्त होने से विवाहोपरांत मिलने वाले शुभ फल कैसे मिल सकते हैं ? भारतीय ज्योतिष में कन्या के विवाह के लिये गुरू की स्थिति देखी जाती है । गुरू के बलवान व शुभ होने पर कन्या को श्रेष्ठ पति सुख मिलता है। देव जागरण (देव प्रबोधिनी एकादशी) तुलसी विवाह से मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं।

अशुभ ग्रह :-

यदि कोई ग्रह
आपकी जन्म कुंडली में अशुभ स्थान
पर बैठकर प्रमोशन में बाधा बन रहा है तो आगे बताए
गए उपाय करने से आपकी समस्या का समाधान हो
सकता है।

ये उपाय इस प्रकार हैं-
1- यदि शनि आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न कर रहा
है, तो एक बर्तन में तिल्ली का तेल लेकर उसमें
अपनी
परछाई देखकर दान कर दें।

2- यदि सूर्य के कारण बाधा हो तो प्रतिदिन पहली
रोटी गाय को दें यदि गाय काली या
पीली हो तो
और भी शुभ रहता है।

3- चन्द्र के कारण बाधा हो शिवलिंग पर कच्चे दूध में
गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें।

4- मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण बाधा हो तो घर की
बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान करें और चांदी
की अंगूठी
या कड़ा पहनें।

5- बुध ग्रह के कारण आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न
हो रही हो तो किसी को चांदी
का आभूषण दान करें।

6- गुरु के प्रभाव के कारण तरक्की में बाधा उत्पन्न
हो रही हो तो रोज गाय को गुड़-चने खिलाएं।

7- यदि शुक्र ग्रह के कारण प्रमोशन रुका हो तो
माता-पिता व घर के अन्य बुजुर्ग लोगों की सेवा करें।
माता के पैर छूकर ही घर से बाहर निकलें।

8- राहु के प्रभाव के कारण बाधा आ रही हो तो
चींटियों को आटा डालें व आटे की गोलियां
बनाकर मछलियों को खिलाएं।

9- केतु का अशुभ प्रभाव हो तो रोज काले कुत्ते को
रोटी पर तेल लगाकर खिलाएं।
मेरे और लेख देखें:- Aapkabhavishya.in, astroguruji.in,gurujiketotke.com, vaidhraj.com,shukracharya.com, rbdhawan@wordpress.com पर भी।

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