मंत्र जप के नियम


Dr.R.B.Dhawan

(Top Astrologer in Delhi, best Astrologer in Delhi)

वैदिक साहित्य में मंत्र जप करने के नियम व निर्देश दिये गये हैं, किस प्रयोग अथवा साधना के लिए सम्बंधित मंत्र का किस नियम से, और कितना जप किया जाना चाहिए मंत्र का जप कहां बैठकर, किस दिशा में, किस आसन में, किस मुहूर्त में, और किस माला से, किया जाना चाहिये? इसके अलावा भी बहुत से नियम हैं, इन सभी नियमों का निर्देश गुरु से प्राप्त होने पर ही मंत्र का जप आरम्भ करना चाहिए। यहां मंत्र जप के साधारण नियमों का उल्लेख किया जा रहा है :-

नग्नावस्था में कभी भी जप नहीं करना चाहिए ।

सिले हुए वस्त्र पहनकर जप नहीं करना चाहिए ।

शरीर व हाथ अपवित्र हों तो जप नहीं करना चाहिए ।

सिर के बाल खुले रखकर जप नहीं करना चाहिए ।

आसन बिछाए बिना जप नहीं करना चाहिए ।

बातें करते हुए जप नहीं करना चाहिए ।

आधिक लोगों की उपस्थिति में प्रयोग के निमित्त जप नहीं करना चाहिए।

मस्तक ढके बिना जप नहीं करना चाहिए।

अस्थिर चित्त से जप नहीं करना चाहिए ।

ऊंघते हुए भी जप नही करना चाहिए।

रास्ते चलते व रास्ते में बैठकर जप नहीं करना चाहिए ।

भोजन करते व रास्ते में बैठकर जप नहीं करना चाहिए ।

निद्रा लेते समय भी जप नहीं करना चाहिए ।

उल्टे-सीधे बैठकर या पांव पसारकर भी कभी जप नहीं करना चाहिए।

जप के समय छींक नहीं लेनी चाहिए, खंखारना नहीं चाहिए, थूकना नहीं चाहिए, गुप्त अंगों का स्पर्श नहीं करना चाहिए, व भयभीत अवस्था में भी जप नहीं करना चाहिए ।

अंधकारयुक्त स्थान में जप नहीं करना चाहिए ।
अशुद्ध व अशुचियुक्त स्थान में जप नहीं करना चाहिए ।

जप की गणना :-

जप की गणना के तीन प्रकार बतलाए गए हैं –

1. वर्णमाला जप।

2. अक्षमाला जप एवं

3. कर माला जप ।

1. वर्णमाला जप :– वर्णमाला के अक्षरों के आधार पर जप संख्या की गणना की जाए, उसे ‘वर्णमाला जप’ कहते हैं ।

2. अक्षमाला जप :– मनकों की माला पर जो जप किया जाता है, उसे अक्षमाला जप कहते हैं । अक्षमाला में एक सौ आठ मनकों की माला को प्रधानता प्राप्त है, और उसके पीछे भी व्यवस्थित वैज्ञानिक रहस्य है। प्रथम:- सम्पूर्ण तारामंडल (सभी ग्रह जिसकी परिक्रमा करते हैं) में 27 नक्षत्र हैं, और हर नक्षत्र के 4-4 चरण हैं, यह 27×4= 108 चरण होते हैं। हर नक्षत्र के प्रत्येक चरण तक मंत्र की सूक्ष्म कम्पन ऊर्जा पहुंचनी चाहिए, इसलिए एक माला में 108 मंत्र अनिवार्य हैं। दूसरा:- जीवन जगत् और सृष्टि का प्राणाधार सूर्य है, जो कि एक मास में एक भ्रमण पूरा कर लेता है । खगोलीय वृत्त 360 अंशों का है, और यदि इसकी कलाएं बनाई जाएं तो 360 × 60 = 21600 सिद्ध होती हैं, चूंकि सूर्य छह मास तक उत्तरायन तथा शेष छह मास दक्षिणायन में रहता है, अतः एक वर्ष में दो अयन होने से यदि इन कलाओं के दो भाग 21600÷2= 10800 सिद्ध होता है । सामंजस्य हेतु अंतिम बिंदुओं से संख्या को मुक्त कर दें तो, शुद्ध संख्या 108 बची रहती हैं, इसलिए भारतीय धर्मग्रंथों में कहीं कहीं उत्तरायन सूर्य के समय सीधे तरीके से तथा दक्षिणायन सूर्य के समय दाएं-बाएं तरीके से एक सौ आठ मनको की माला फेरने का विधान है, जिस से कार्यसिद्धि में शीघ्र सफलता मिलती है।

भारतीय कालगति में एक दिन रात का परिणाम 60 घड़ी माना गया है , जिसके 60 × 60 = 3600 पल तथा 3600 × 60 = 21600 विपल सिद्ध होते हैं । इस प्रकार इसके दो भाग करने से 10800 विपल दिन के और इतने ही रात्रि के सिद्ध होते हैं, और शुभकार्य में अहोरात्र का पूर्व भाग (दिन को) ही उत्तम माना गया है, जिसके विपल 10800 हैं, अतः उस शुभ कर्म में 108 मनकों की माला को प्रधानता देना भी तर्क संगत और वैज्ञानिक दृष्टि से उचित है । किसी भी मंत्र भी हजार अथवा लाख संख्या की गणना माला द्वारा ही संभव है । इसके लिए 108 मनकों की माला सर्वश्रेष्ठ मानी गई है ।

3. करमाला जप :- हाथ की उंगलियों के पोरवों (पर्वो) पर जो जप किया जाता है, उसे “करमाला जप” कहते हैं । नित्य सामान्यतः बिना माला के भी जप किया जा सकता है, किन्तु विशिष्ट कार्य या अनुष्ठान-प्रयोग हेतु माला प्रयोग में लाई जाती है ।

माला संबंधी सावधानी :- माला फेरते समय निम्न सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं कि माला सदा दाहिने हाथ में रखनी चाहिए । गोमुखी में रखकर या वस्त्र से ढककर ही जप करें। माला भूमि पर नहीं गिरनी चाहिए, उस पर धूल नहीं जमनी चाहिए । माला अंगूठे, मध्यमा व अनामिका से फेरना ठीक है । दूसरी उंगली तर्जनी से भूलकर भी माला नहीं फेरनी चाहिए । (कर्मविशेष छोड़कर)। मनकों पर नाखून नहीं लगने चाहिए । माला में जो सुमेरु होता है, उसे लांघना नहीं चाहिए । यदि दुबारा माला फेरनी हो तो वापस माला बदलकर फेरें । मनके फिराते समय सुमेरु भूमि का कभी स्पर्श न करें । इस बात के प्रति सदा सावधान रहना चाहिए ।

मेरे और लेख देखें :- Aapkabhavishya.in, astroguruji.in, gurujiketotke.com,vaidhraj.com,shukracharya.com, rbdhawan@wordpress.com पर भी।

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