Astrology Course in Distance

SHUKRACHARYA

(Professional Astrological Course)

ज्योतिष/ज्योतिषीय पाठ्यक्रम पत्राचार से उपलब्ध –

परिचय- Shukracharya Astrological Research Centre, शुक्राचार्य (एस्ट्रोलाॅजिकल रिसर्च सेंटर) की स्थापना ज्योतिष जैसी वैदिक विद्याओं तथा अन्य भारतीय गूढ़ विद्याओं का विश्व स्तर पर प्रसार-प्रचार करने के उद्देश्य से Dr.R.B.Dhawan धवन द्वारा 1995 में की गई थीं, जिससे कि इस वैदिक विज्ञान वाले विषय की उपयोगिता का विश्वस्तर पर प्रकाश हो, और इसके उपयोग से मानवता की सेवा की जा सके।

संस्थान के मुख्य कार्यक्रम एवं उद्देशय:-
यह संस्थान प्राचीन वैदिक ज्योतिष vaidic astrology के आधार पर ज्योतिष विज्ञान में रूची रखने वाले जिज्ञासुओं को ज्योतिष विषय के पाठ्यक्रमों की सुविधा प्रदान करता है।

संस्थान के संस्थापक एवं मुख्य संचालक Dr.R.B.Dhawan जी हैं। ये अपनी टीम के साथ निरंतर अनुसंधान एवं शिक्षण कार्य में समर्पित भाव से कार्यरत हैं।

ज्योतिर्विद्या, हस्तरेखा-शास्त्र, अंक-शास्त्र, वास्तु शास्त्र, लाल किताब एवं ज्योतिषीय उपाय आदि विषयों की शिक्षा पत्राचार पाठ्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध करवाई जा रही है।

पारम्परिक ज्योतिष एवं इससे जुड़ी अन्य सभी विद्याओं के ज्ञान को सुरक्षित रखने की दृष्टि से इन सभी अति विशिष्ट विद्याओं के अध्ययन अध्यापन की व्यवस्था करना संस्थान का मुख्य उद्देश्य है।

सम्पूर्ण भारतवर्ष में ज्योतिष विज्ञान के अध्यन अध्यापन हेतु क्षेत्रिय प्रशिक्षण केन्द्र खोलने का संकल्प। और उनके संचालन व देख-रेख हेतु क्षेत्रीय फ्रेन्चाईजी (सेंटर) आरम्भ करने का संकल्प है।

मुख्य केन्द्र (दिल्ली) तथा देश के सभी स्थानीय केन्द्रों में ज्योतिष तथा इस से सम्बंधित अन्य वैदिक विद्याओं की निरंतर कक्षाओं एवं शिक्षा (अध्यन अध्यापन) की व्यवस्था करवाना एक लक्ष्य है।

मुख्य केन्द्र (दिल्ली) तथा देश के सभी स्थानीय केन्द्रों में ज्योतिष तथा इस से सम्बंधित अन्य वैदिक विद्याओं vaidic astrology की पत्राचार पाठ्यक्रम द्वारा शिक्षा (अध्यन अध्यापन) के लिये व्यवस्था करना उद्देश्य है।

निरंतर तथा पत्राचार द्वारा देश के अधिकांश शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ज्योतिष पठ्यक्रम उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है।

मासिक ज्योतिषीय पत्रिका (वर्तमान में AAP ka Bhavishya) तथा अन्य उपयोगी पुस्तकें एवं सम्बंधित विषयों के मौलिक ग्रंथ, भाष्य और अनुवाद आदि प्रकाशित करना निरंतर जारी है।

ज्योतिष विज्ञान की पाठ्य पुस्तकों तथा अन्य आधुनिक माध्यमों जैसे-इलैक्ट्रानिक मीडिया, साॅफ्टवेयर, मोबाईल एप, कैसेट या सी. डी. इत्यादि के माध्यम से शोध-निष्कर्षों और भारतीय विद्याओं की उपयोगी अनुसंधानात्मक सामग्री को प्रकाशित करना निरंतर जारी है।

उपरोक्त विषय के विद्वानों को प्रोत्साहित कर उनके विचार प्रकाशित करना। संगोष्टियों तथा सभाओं का आयोजन कर विद्वानों को समय-समय पर सम्मानित करना तथा भारतीय वैदिक विद्याओं vaidic astrology के उत्थान में समर्पित अन्य संस्थाओं को सहयोग देना निरंतर जारी है।

उपरोक्त विद्याओं के विकास के लिये उपयोगी सामग्री जैसे- धर्म-ग्रंथ, सभी प्रकार की पूजा एवं साधना सामग्री, Jyotish software साफ्टवेयर एवं उपयोगी टी. वी. कार्यक्रमों की सी. डी. इत्यादि उचित मूल्य पर विद्वानों को उपलब्ध करवाना निरंतर जारी है।

शुक्राचार्य द्वारा उपलब्ध पाठ्यक्रम:-

वह विद्यार्थी जिन्हें ज्योतिष फलादेश या ज्योतिषीय गणना, अंकशास्त्र, वास्तुशास्त्र अथवा हस्तरेखा शास्त्र जैसे वैदिक विषयों की शिक्षा प्राप्त करने में रुचि है, वे शुक्राचार्य संस्थान द्वारा संचालित सर्टिफिकेट कोर्स Certificate Cource में प्रवेश ले सकते हैं। इन पाठ्यक्रमों को इस प्रकार बनाया गया है कि वह प्रत्येक विद्यार्थी के लिए व्यवसायिक उपयोग के लिये उपयोगी हों।

1. ज्योतिष दैवज्ञ (Jyotish Daivagya) :- यह पाठ्यक्रम नवीन विद्यार्थियों के लिए है, जो ज्योतिष जगत में पहला कदम रख रहे हैं, जो ज्योतिष शास्त्र horoscope के मूल अवयवों का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। मूल रूप से यह एक स्वाध्याय उपकरण Astrological Hobby Course है। यह उन नये विद्यार्थीयों के लिये उपयोगी है, जो ज्योतिष जगत को समझकर ज्योतिष के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं। इस पाठ्यक्रम में ज्योतिष की उत्पत्ति ज्योतिष शास्त्र की विशेषताएं, नक्षत्र व 9 ग्रहों का परिचय और स्वभाव, 12 राशियां और उनका स्वभाव तथा कुण्डली के 12 भावों का परिचय और उन भावों का फलादेश में प्रयोग, ग्रहों की दृष्टियां, ग्रहों की मैत्री-शत्रुता, ग्रहों की अवस्था इत्यादि समझाते हुये पंचांग देखना भी सिखाया जाता है। यह Certificate Cource है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

2. ज्योतिष दैवज्ञाचार्य (Jyotish Daivagyacharya) :– यह पाठ्यक्रम ज्योतिष शास्त्र की गहराइयों को समझने के लिये Professional Course है, इस पाठ्यक्रम में ज्योतिषीय फलादेश तथा ज्योतिषीय गणना के अतिरिक्त ग्रहों की युतियों, दृष्टियों को समझाते हुये फलादेश करने के गोपनीय सूत्र Secret Astrological formulas तथा जीवन के प्रमुख अंगों, अवसरों, सम्बंधियों, आर्थिक तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं, शारीरिक अंगों का फलादेश करना तथा जीवन की लगभग सभी आवश्यकताओं के लिये फलादेश करना समझाया जाता है। यह ज्योतिष पाठ्यक्रम ज्योतिष शास्त्र horoscope की गहराइयों को समझने की मुख्य सीढ़ी है। (एक प्रकार से जन्मपत्रिका का पूर्ण विवेचन करना सिखाया जाता है।) इस के द्वितीय भाग में खगोलीय परिचय, लग्न की गणना, ग्रहों की गणना, नक्षत्र nakshatra गणना वर्ग कुण्डलियों की रचना तथा प्रमुख खगोलीय (ज्योतिषीय) गणनायें, आधुनिक विधि से जन्मकुण्डली का निर्माण एवं ग्रहों की महादशा vimshotari mahadasha व अंतरदशाओं की गणना, अष्टकवर्ग Astakvarga गणना व अष्टकवर्ग निमार्ण की शिक्षा दी जाती है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।) Professional Astrological Course

3. ज्योतिष शिरोमणी (Jyotish Shiromani) :- यह पाठ्यक्रम ज्योतिष शास्त्र की गहराइयों को समझने के लिये Expert Astrology Cource है। इस पाठ्यक्रम के प्रथम भाग में अष्टकवर्ग की अतिरिक्त गणना, आयु की गणना तथा आयुविचार में जातक की आयु की गणना करना सिखाया जाता है।, कुंडली Kundli Milan मिलान एवं मुहूर्त की गणना, तथा वर्षफल गणना की पूर्ण जानकारी दी जाती है। द्वितीय भाग में कुण्डली मिलान एवं मुहूर्त आदि देखना। Astakvarga अष्टकवर्ग के अतिरिक्त फलादेश, कुंडली मिलान एवं फलादेश, मुहूर्त का फलादेश, तथा वर्षफल के फलादेश की पूर्ण रूप से जानकारी तथा प्रश्न कुण्डली prashna kundli के सिद्धांत एवं प्रश्न कर्ता के प्रश्न पूछने के समय की कुण्डली बनाकर उत्तर देना सिखाया जाता है। यह प्रश्न कुण्डली सिद्धांत इस पाठ्यक्रम में सिखाया जाता है। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थी प्रतिदिन काम आने वाली भविष्यवाणी vimshotari mahadasha फलादेश या मिलान एवं मुहूर्त आदि देख सकता है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 1वर्ष है।) Professional Astrological Course

4. ज्योतिष तत्ववेत्ता (Jyotish Tatvaveta) :- यह पाठ्यक्रम केवल शोध एवं अनुसंधान Astrological Research पर आधारित है। इस पाठ्यक्रम में शोध के लिए डाटा इकट्ठा कर अनुसंधान करवाया जाता है। ग्रंथों में दिए गए नियम कितने सही हैं? यह प्रमाणित करना एवं नए नियम प्रस्तावित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। इसमें छात्रों को शोध पत्र Astrology Theses लिखना होगा, एवं पत्र पत्रिकाओं में छपवाना आवश्यक होगा। इसमें ग्रह-नक्षत्रों nakshatra के आधार पर कुण्डली के किसी एक भाव पर भी शोध कर सकते हैं, अथवा अपनी रूची तथा अर्जित ज्ञान के अनुसार- गोचर विचार, मांगलिक विचार, कुण्डली मिलान, प्रश्न-कुण्डली, अष्टकवर्ग फलादेश या पंचांग एवं मुहूर्त में से किसी भी एक विषय पर अनुसंधान कर सकते हैं। यह पाठ्यक्रम केवल शोध एवं अनुसंधान कार्य के लिए Dr.R.B.Dhawan द्वारा प्रस्तुत किया गया है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 1वर्ष है।)

5. अंक शास्त्राचार्य (Numerology) :- यह पाठ्यक्रम नवीन विद्यार्थियों के लिए है, जो अंक शास्त्र सीखना चाहते हैं, इस के द्वारा आप शुभ अंक एवं नामांक आदि के बारे में जान सकते हैं। नाम को भाग्यशाली व अनुकूल बनाना इसका मुख्य विषय है। इसमें अंकशास्त्र के मूल अवयवों का ज्ञान प्राप्त करना तथा अंकशास्त्र के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार अंकों का प्रयोग कर भविष्यफल ज्ञात करना सम्मीलित है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

6. अंक शिरोमणी (Adwance Numerology) :- इस पाठ्यक्रम में अंकशास्त्र के नियमों के अनुसार अंकों का हमारे जीवन में क्या महत्व है, तथा अंकशास्त्र से अपने नाम, कम्पनी के नाम, अपने एकाऊँट नम्बर या वाहन नम्बर को कैसे भाग्यशाली बना सकते हैं? विस्तार पूर्वक समझाया गया है यह पाठ्यक्रम अंकशास्त्र की द्वितीय सीढ़ी है, इसमें अंकों के अनुसार प्रश्न फल का विचार तथा पद्धति का फार्मूला भी दिया गया है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

7. वास्तु आचार्य (Vastushastra) :- यह पाठ्यक्रम नवीन विद्यार्थियों के लिए है, जो वास्तुशास्त्र के मूल अवयवों का ज्ञान प्राप्त कर वास्तु विशेषज्ञ बनना चाहते हैं। इस में वास्तु के मूल ग्रन्थों का स्वाध्याय करना होता है। आर्किटेक्ट, बिल्डर एवं उन सब के लिए जो कोई भवन, कार्यालय आदि निर्माण करने का विचार कर रहे हैं, उनके लिए यह पाठ्यक्रम अत्युत्तम है। गृहिणीयों के लिये भी उपयोगी है, जो अपने घर या कार्यालय को वास्तु सम्मत सजाना चाहती हैं। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

8. वास्तु शिरोमणी (Adwance Vastushastra) :- पाठ्यक्रम के इस भाग में जो विद्यार्थी वास्तु नियम जानते हैं, लेकिन उनका उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं, इसमें प्रवेश ले सकते हैं। इसमें वास्तु दोष एवं निवारण पर विशेष बल दिया जाता है। वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार अनेक प्रकार के उदाहरणों के द्वारा भवन, मंदिर, कार्यालय, फैक्ट्री इत्यादि में वास्तुदोष की बारीकियों को समझाते हुये उन दोषों का वास्तु अनुरूप निवारण दिया गया है। इस में वास्तु संबंधित उच्च स्तरीय उपायों का भी अध्ययन होता है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

9. हस्तरेखा आचार्य (palmistry) :- यह पाठ्यक्रम उन सभी नवीन विद्यार्थियों के लिए है जो हस्तरेखा विज्ञान सीखना चाहते हैं। जो हस्तरेखा शास्त्र के मूल अवयवों का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। यह नये विद्यार्थीयों के लिये भी उपयोगी है, इस पाठ्यक्रम में हस्तरेखा परीक्षण के सामान्य सिद्धांतों के अतिरिक्त, हस्त की प्रमुख रेखाओं, चिन्हों, पर्वों व पवर्तों के अतिरिक्त शरीर लक्षणों Body Language को समझकर हस्त परीक्षण, अंगुष्ठ विचार, पर्व एवं चिह्न विचार एवं अनेक प्रकार की छोटी-बड़ी रेखाओं के बारे में बताया जाता है, जिससे कि हाथ देखकर भविष्यवाणी की जा सके। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

10. हस्तरेखा शिरोमणी (Adwance Palmistry) :- यह पाठ्यक्रम हस्तरेखा शास्त्र की गहराईयों को समझने की दूसरी सीढ़ी है, इस पाठ्यक्रम में हाथ की बनानट और भेद, ग्रह रेखाओं के अनुसार मानव स्वाभाव, हस्तरेखाओं के सभी 16 भेद, शुभ-अशुभ चिन्ह, अनेक महत्वपूर्ण हस्तरेखाओं और लक्षणों का तुलनात्मक विचार किया गया है। हस्तरेखा ज्ञान में पूर्णता हेतु यह पाठ्यक्रम आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम में अनेक प्रकार के प्रश्न जैसे स्वास्थ्य, धन, व्यवसाय, शिक्षा, आयु आदि का विचार किया जाता है। अनेक प्रकार के उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। मुखाकृति विज्ञान Face Reading की पूर्ण जानकारी भी इसमें दी जाती है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

11. लाल किताब आचार्य (Lal Kitab Acharya) :- पाठ्यक्रम के प्रथम भाग में लाल-किताब के नियमों के अनुसार ग्रहों का लाल किताब में प्रकार जैसे- अंधे ग्रह, रतांध ग्रह, धर्मी ग्रह, मुकाबले के ग्रह, टकराव के ग्रह इत्यादि के रहस्य विस्तार पूर्वक समझाये गये हैं। इस पाठ्यक्रम में लाल किताब के अनुसार वर्षफल बनाने तथा फलादेश का फार्मूला भी दिया गया है। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

12. लाल किताब शिरोमणी (Adwance Lal Kitab Acharya) :- पाठ्यक्रम के इस भाग में लाल किताब के अनुसार प्रथम से लेकर द्वादश भाव तक का लाल किताब के अनुसार फलादेश, सूर्य से लेकर केतु तक सभी 9 ग्रहों का लाल किताब के अनुसार फलादेश, अनेक प्रकार की ग्रहस्थितियों एवं योगों का फलादेश तथा प्रत्येक ग्रह, भाव या योग के विपरीत प्रभाव को दूर करने के लाल किताब अनुसार उपाय दिये गये हैं। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

13. उपाय आचार्य (Remedial Astrology) :- यह पाठ्यक्रम ज्योतिषीय उपायों में रूचि रखने वाले उन जिज्ञासुओं व विद्यार्थियों के लिये स्वाध्याय उपकरण व प्रथम सीढ़ी है, जो उपाय-शास्त्र के मूल अवयवों का ज्ञान प्राप्त करना तथा सामान्य सिद्धांतों के अनुसार उपायों का प्रयोग कर सकारात्मक परिणाम चाहते हैं। उपाय शास्त्र के सिद्धांतों को समझकर आगे के पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

14. उपाय शिरोमणी (Adwance Remedial Astrology) :- इस पाठ्यक्रम में उपाय-शास्त्र के नियमों के अनुसार मंत्र-तंत्र का हमारे जीवन में क्या महत्व है, तथा शास्त्रीय प्रयोगों के द्वारा मारण-मोहन आदि भयंकर अभिचारों से रक्षा करने वाले, व्याधिनाश तथा कष्टकारी ग्रहों से रक्षा करने वाले, अकालमृत्यु शमन प्रयोग, ऐश्वर्य एवं आरोग्य प्रदायक प्रयोग, तथा नजरदोष की पहचान व उपाय सम्मीलित हैं। (इस पाठ्यक्रम की अवधि 6 माह है।)

Shukracharya, F-265, Gali No 22, Laxmi Nagar, Delhi -110092, Tel. 011-22455184, mobile : 09810143516

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