छ: मुखी रूद्राक्ष, 6 Mukhi Original Nepal rudraksha

छ: मुखी रूद्राक्ष- 6 Mukhi Rudraksha Nepal, 6 Mukhi Rudraksha Original Nepal –

Dr.R.B.Dhawan, top best astrologer in delhi

छः मुखी रूद्राक्ष पर छः धारियाँ होती हैं, छः मुखी रूद्राक्ष शिव पुत्र कार्तिकेय की भक्ति का केन्द्र बिन्दु है। कार्तिकेय भगवान् नेतृत्व गुण, ऊर्जा व साहस के देव हैं। इस रूद्राक्ष को धारण करने से धारक को भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा प्राप्त होती है, और सांसारिक दुःखों से लड़ने की क्षमता प्राप्त करके वे जीवन के स्तर को अति उत्तम बना सकता है। यह रूद्राक्ष विद्या प्राप्ति के लिये भी श्रेष्ठ है। विद्या, ज्ञान, बुद्धि का प्रदाता छः मुखी रूद्राक्ष पढ़ने वाले विद्यार्थीयों, बौद्धिक कार्य करने वालों को बौद्धिक बल प्रदान करता है। इससे गुप्त व प्रकट सभी प्रकारी के शत्रुओं की शत्रुता नष्ट हो जाती है, अतः इसे ’शत्रुंजय रूद्राक्ष’ भी कहते हैं। निसंदेह छः मुखी रूद्राक्ष को पहनने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसकी माला जपने से विपत्ति नष्ट होती हैं, व पीड़ाएँ कम होती हैं। छः मुखी रूद्राक्ष ऋिद्धि और सिद्धि प्राप्त करने में भी चमत्कारी परिणाम प्रकट करता है। कहा जाता है कि देवी अन्नपूर्णा छह मुखी रूद्राक्ष के धारण से घर में हमेशा विराजमान रहती हैं। यह व्यक्ति को अच्छे कर्म करने में मदद करता है, और वह व्यक्ति सदाचारी, संतुष्ट और गुणवान बनता है। इसे धारण करने से धारक की सोई हुई शक्तियां जागृत होती हैं। यह आत्म शक्ति, ज्ञान शक्ति व संकल्प शक्ति में वृद्धि करता है। छः मुखी रूद्राक्ष व्यक्ति की इच्छा शक्ति, अभिव्यक्ति की ताकत, ग्रहण करने शक्ति को बढ़ाता है, और फिर वह व्यक्ति मानसिक रूप से शक्तिशाली हो जाता है। इसलिये यह छात्रों के लिये बहुत उपयोगी रूद्राक्ष होता है। यह रूद्राक्ष धारक को वशीकरण की शक्ति भी प्रदान करता है, और उसे परिहास युक्त, सुशील व सुंदर बनाता है। इसलिये यह सार्वजनिक रूप से सक्रिय लोगों के लिये लाभदायक है, जैसे कलाकार और राजनीतिज्ञ। यह रूद्राक्ष सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत करने में सहायक सिद्ध होता है। छः मुखी रूद्राक्ष शुक्र ग्रह के अनुसार यौन संबधी व यौन अंगों की बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। आरोग्य के लिये इसे पंचमुखी रूद्राक्ष के साथ धारण करना चाहिये। मानसिक विकृति, मिर्गी और स्त्री रोगों को भी इस रूद्राक्ष के धारण से दूर किया जा सकता है। शिक्षा में उच्च सफलता के लिये इसे चमुर्मुखी रूद्राक्ष के साथ धारण करते हैं। यह आँखों को लाभ पहुँचाता है, और मुख के रोग, मूत्र संबधी रोग, गले के रोग एवं जलोदर में भी हितकारी है। निसंतान युगल संतान प्राप्ति हेतु इसे गौरी-शंकर रूद्राक्ष के साथ अथवा द्विमुखी रूद्राक्ष के साथ प्रयोग कर सकते हैं। हकलाने वाले जातक जैसे वाणी दोष वालों के लिये भी यह कारगर सिद्ध होता है। षट्मुखी रूद्राक्ष का दाना व त्रयोदशमुखी दाने को धारण करने वाला धारक मानसिक तौर पर सतर्क और जोश से भरपूर रहता है। इस रूद्राक्ष को धारण करने से छः प्रकार की बुराईयां- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर नष्ट होते हैं। इसके संचालक ग्रह शुक्र देव हैं।

इसका धारण मंत्र है- ॐ हृीं हुं नमः। ॐ षडाननाय नमः। इस मंत्र के साथ यह रूद्राक्ष धारण करें।
चैतन्य करने का मंत्र- ॐ ह्यूं नमः। ॐ ह्यूं। ॐ हृीं श्रीं क्लीं सौं ऐं।।
उपयोग- प्रशासनिक कौशल्य, शोध कार्य में सफलता। कानूनी समस्यायें, व्यक्तिगत संबध।

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