तीन मुखी रूद्राक्ष, 3 Mukhi Rudraksha

तीन मुखी रूद्राक्ष, 3 Mukhi Rudraksha Nepal, 3 Mukhi Original Nepal rudraksha –

Dr.R.B.Dhawan, top best astrologer in delhi

तीन मुखी रूद्राक्ष त्रिदेव बह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है। तीन मुखी रूद्राक्ष में त्रिमूर्ति की शक्तियां समाहित होती हैं, और यह साधना में रूची रखने वाले या साधनाओं में संलग्न रहने वाले व्यक्तियों को शुभ फल देने वाला रूद्राक्ष है। यह रूद्राक्ष अग्नि स्वरूप रूद्राक्ष माना गया है। सत्व, रज और तम-इन तीनों गुणों का स्वामी हाने से यह त्रिगुणात्मक शक्तियों का स्वरूप है। यह रूद्राक्ष जातक को भूत, भविष्य और वर्तमान का ज्ञान देने वाला है। इसे धारण करने वाले मनुष्य की विध्वंसात्मक प्रवृत्तियों का स्वयं ही दमन हो जाता है, और उसमें रचनात्मक प्रवृत्तियों को उदय होता है। जीवन धाराप्रवाह चलता है, और अल्पायु तथा मृत्यु का भय भी नहीं रहता। यह उच्च शिक्षा देता है, निम्न रक्तचाप से मुक्ति दिलाता है, मंदबुद्धि बालकों के लिये अधिक उपयोगी रूद्राक्ष है, शास्त्रों के अनुसार यह इच्छा शक्ति, ज्ञान और क्रिया शक्ति मिश्रित रूप है, अतः यह ब्रह्म शक्ति का द्योतक भी है। इसकी माला से शिव मंत्र का जप करने से साधक को यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है, तथा उसकी सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं।

चिकित्सक भी यह दावा करते हैं, कि तीन मुखी रूद्राक्ष कई बीमारियों और रोगों का निवारण कर सकता है। नेपाली तीन मुखी रूद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति कभी भी बीमारियों या कमजोरी से कष्ट नहीं उठाता है। तीन मुखी रूद्राक्ष पीलिया रोग का रामबाण इलाज है। तीन मुखी रूद्राक्ष नौकरी ढूंढने वाले व्यक्तियों को निश्चित ही शीघ्र सफलता देता है, और बेरोजगारी को टालता है। तीन मुखी रूद्राक्ष धारक को स्त्री के श्राप से भी मुक्ति मिलती है। शिवपुराण के अनुसार तीन मुखी रूद्राक्ष कठिन साधना से मिलने वाले फल के बराबर फल देने वाला बताया गया है। तीन मुखी रूद्राक्ष शौर्य और ऐश्वर्य को बढ़ाने वाला होता है। मंगल ग्रह से इस का सम्बंध होने के कारण सोचने की शक्ति और विषय पर एकाग्रता लाना इस रूद्राक्ष के प्रधान गुण हैं। त्रिमुखी अग्निदेव की तरह सब दोषों को शुद्ध करता है। धारक पूर्व जन्म के पापों से मुक्त होता है, और पवित्र होकर नया जीवन प्रारम्भ करता है। यह रचनात्मक बुद्धि की शक्ति को बढ़ा देता है। इसे धारण करने वाला रचनात्मक संसाधनों में स्वतः सफलता प्राप्त करने लगता है। इस रूद्राक्ष के देवता मंगल देव हैं। जिन लोगों को विद्या प्राप्ति में कठिनाई आ रही हो, उन्हें दो मुखी के साथ तीन मुखी रूद्राक्ष भी धारण करना चाहिये।

तीन मुखी रूद्राक्ष धारण करने का मंत्र- ॐ क्लीं नमः ॐ अग्नये नमः।
चैतन्य करने का मंत्र- ॐ रं इं हृीं हूं ॐ ।
उपयोग- जीवन की गूढ़ समस्याएँ और तीव्र रोष, उदासी, चिन्ता, दोष भावना एवं शैथिल्य से मुक्ति।

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