पांच मुखी रूद्राक्ष, 5 Mukhi Rudraksha

पांच मुखी रूद्राक्ष- 5 Mukhi Rudraksha Nepal, 5 Mukhi Rudraksha Original Nepal –

Dr.R.B.Dhawan, top best astrologer in delhi

पाँच मुखी रूद्राक्ष पर पाँच धारियाँ होती हैं, पाँच मुखी रूद्राक्ष साक्षात् रूद्र स्वरूप है, इसे कालाग्नि के नाम से भी जाना जाता है। सधोजात्, ईशान, तत्पुरूष, अघोर तथा कामदेव, शिव के ये पाँचों रूप पंचमुखी रूद्राक्ष में निवास करते हैं। यह रूद्राक्ष अपनी रोगनिवारक क्षमता और आरोग्यता प्रदान करने के लिये विख्यात है। इस रूद्राक्ष को धारण करने से दीर्घायु और बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यह धारक को अपेक्षित अप्रिय घटनाओं से बचाता है, और आध्यात्मिक शक्तियों से आर्शिवाद प्राप्त होता है, धारक का मन सदा प्रसन्नता से परिपूर्ण रहता है। पंचमुखी रूद्राक्ष पंच देवों (विष्णु, शिव, गणेष, सूर्य और देवी) का स्वरूप है। पंचमुखी रूद्राक्ष का प्रयोग शिव-शक्ति के हर रूप की साधना व ध्यान के लिये किया जाता है। यह पंच तत्वों को नियंत्रित करता है। यह रूद्राक्ष भगवान शिव का पंचानन रूप है। भगवान के पाँच रूप अद्योजात, ईशान, तत्पुरूष, अघोर एवं वामदेव पंचमुखी रूद्राक्ष में निवास करते हैं। पंचवक्त्रः स्वयं रूद्राः कालाग्र्निाम नामतः। कुछ लोग इस रूद्राक्ष को रूद्र-कालाग्नि भी कहते हैं। जब रूद्राक्षों का संयोग करते हैं, तब पंचमुखी रूद्राक्ष का संयोजन आवश्यक होता है। अधिकतर मालायें पंचमुखी रूद्राक्ष की होती हैं। रूद्राक्ष कहीं के भी क्यों न हों, भारत, नेपाल या इंडोनेशिया, 60 से 70 प्रतिशत दाने पंचमुखी ही होते हैं। विशेष ऊर्जा प्राप्त करने के लिये पंच मुखी रूद्राक्ष के तीन दानों को (हर दाने की पूंछ के साथ दूसरे दाने मुख मिलाकर पिरोई गई माला) एक साथ पहनना चाहिये, इस प्रकार की 3 दानों की पंचमुखी रूद्राक्ष माला शत्रु को नष्ट करने या शत्रु पर नियंत्रण करने में अद्भुत परिणाम देती है। पंच मुखी रूद्राक्ष धारक को विषैले जानवर जैसे सर्प या बिच्छू से रक्षा करता है, और धारक को मन की शांति और समृद्धि प्रदान करता है। माना जाता है कि बृहस्पति के कुप्रभाव से मन की शांति नष्ट होती है, दारिद्रता आती है, सौहार्द्रता की कमी होती है, चर्बी संबधी, किडनी, कान की बीमारियां, रक्तचाप, मधुमेह आदि पैदा होते हैं। इसलिये पंचमुखी रूद्राक्ष बृहस्पति ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करके शरीर की अग्नि धातु को परिशुद्ध करता है, और इसी सिद्धांत से पंचमुखी रूद्राक्ष का धारण मनुष्य के अवगुणों और उसकी सभी बुराईयों को दूर करता है, और उसे तन-मन से पवित्र बनाता है। धारक पशुभावों से मुक्त होकर एक उद्यत देव के समान जीवन व्यतीत करता है। इस प्रकार यह रूद्राक्ष सर्वकल्याणकारी, मंगलप्रदाता एवं आयुष्यवर्द्धक है। महामृत्युंजय इत्यादि अनुष्ठानों में इसका ही प्रयोग होता है। यह अभीष्ट सिद्धि प्रदाता रूद्राक्ष है। पंचमुखी रूद्राक्ष सबसे सुरक्षित तथा अल्मोली विकल्प है, यह रूद्राक्ष सभी प्रकार के पापों के प्रभाव को भी नष्ट करता है। यह ध्यान हेतु उत्तम धारणीय फल है, रक्तचाप को सामान्य बनाये रखता है, यह शैक्षिक उन्नति देता है, और मस्तिष्क पर शांत प्रभाव में लाता है। यह रूद्राक्ष स्मरण शक्ति को दुरूस्त करने में बहुत मददगार है, अर्थात जब व्यक्ति की स्मरण शक्ति क्षीण हो जाती है, तो यह रूद्राक्ष बहुत उपयोगी है। इस रूद्राक्ष के देवता सत्तारूढ़ गुरू ग्रह हैं।

रूद्राक्ष धारण का मंत्र- ॐ ह्यी नमः। ॐ नमः श्विाय। इस मंत्र के साथ पंचमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिये।
चैतन्य करने का मंत्र- ऊँ ह्यँ आ क्ष्म्यौं स्वाहा।
उपयोग- उच्च रक्तचाप, स्मृतिनाश, उदासी, चिंता मधुमेह।

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