गोमेद

कब धारण करें- राहु रत्न गोमेद :-

Dr.R.B.Dhawan (Astrological Consultant),

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ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार गोमेद राहु का रत्न है, गोमेद को अंग्रेजी में Hessonite कहते हैं।

गोमेद को ज्योतिष विज्ञान में राहु ग्रह के अनिष्ट व निर्बल प्रभावों को नियंत्रित करने हेतु प्रयुक्त किया जाता है। सुन्दर आकर्षक, चमकदार, चिकना, उल्लू की आंखों के समान, अंगारे तथा मृदु प्रकाश के समान प्रतीत होने वाला यह रत्न पारदर्शक, अर्द्धपारदर्शक व अपारदर्शक रूपों में पाया जाता है। इस रत्न के उत्पादकों के रूप में आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, नोर्वे, चीन, बर्मा, ईरान आदि देशों के नाम काफी प्रमुख हैं, परन्तु श्रीलंका से प्राप्त होने वाले गोमेद रत्न सुन्दरता के दृष्टिकोण से उत्तम श्रेणी के माने जाते हैं। ऐसे भारत में केदारनाथ, त्रावणकोर व बिहार प्रांत के गया जिले के क्षेत्रों से भी गोमेद रत्न प्राप्त होते हैं। परन्तु गुणों के आधार पर इन्हें मध्य श्रेणी का माना जाता है।

वैज्ञानिक स्वरूप:- वैज्ञानिक तौर पर गोमेद रत्न जिरसोनियम आक्साइड, सिलिकन आक्साइड व कैल्शियम का एक ठोस संगठन है, जिसका आपेक्षिक धनत्व 4.65 से 4.71 वर्तनांक 1.93 से 1.98, दुहरावर्तन 0.06 तथा कठोरता 7.5 तक के लगभग आंका जाता है।

प्राकृतिक स्वरूप:- गोमेद रत्न सुडौल मृदुघाट के निर्मल अर्थात माणिक्य, पुखराज, नीलम, लहसुनियाँ आदि रत्नों से कम कठोर, औसत से अधिक वजनदार तथा भूरे, केसर, पीले, गौमूत्र के समान आदि प्रकृतिक रंगों में पाये जाते हैं, जिसमें मधु के समान झाईयाँ पाई जाती हैं।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण :- धन, यश, राजनीति, अनुसंधान, दुर्भाग्य, प्रेतबाधा, चिंता, विलासिता, साहस, क्रोध, शत्रु की पराजय, दुर्घटना, त्वचा व गुप्त रोगों के सूचक राहु ग्रह हैं, और उपरोक्त संबंधित नकारात्मक प्रभाव को नियंत्रित करने हेतु राहु रत्न गोमेद धारण करने की सलाह दी जाती है। राहु के विषय में ज्योतिषीय धारणा है कि राहु के किसी भी राशि का प्रतिनिधित्व न करने के कारण उसके मित्र ग्रह बुध, शुक्र व शनि की राशियां वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व मीन के हेतु कारक, समभाव के ग्रह गुरू की राशियाँ धनु व मीन के हेतु सामान्य तथा चंद्र, सूर्य व मंगल के साथ शत्रुभाव रखने के कारण उनकी राशियां कर्क, सिंह, मेष व वृश्चिक राशि के हेतु प्रतिकूल रत्न के रूप में जाना जाता है।

गोमेद रत्न की पहचान:-
– उत्तम श्रेणी के गोमेद रत्न को यदि लकड़ी के बुरादे से घिसें तो इसकी चमक में वृद्धि हो जाती है।
– गोमेद रत्न को गौ-मूत्र में यदि चैबीस, पच्चीस घंटे रख दें तो गौ-मूत्र का रंग बलद जाता है।
– ऐसा माना जाता है कि गोमेद रत्न को यदि गौ के दूध में रख दें तो उस दूध का रंग गौ-मूत्र के समान हो जाता है।

दोष युक्त गोमेद:- गोमेद रत्न खरीदते समय इस बात का ध्यान अवश्य देना चाहिये कि उस पर लाल रंग अर्थात रक्त के समान छीटें ना दिखाई पड़े, ऐसा रत्न संतान सुख के लिये अहितकारी माना गया है। बिना चमक या सुन्न जैसे रत्न को रोगवर्धक व स्त्री सुख के हेतु हानिकारक कहा गया है। कई रंगों की छीटें या धब्बे व जिस रत्न पर गड्ढा पाया जाए उसे धन संपत्ति व पशुधन के हेतु हाानिकारक माना गया है। श्यामल, दुरंगा, दरार व जाल युक्त गोमेद वंश, बंधु, स्थाई निवास, आदि सुखों के हेतु घातक माने जाते हैं तथा इसे धारण करने से भाग्य में व्यवधान उत्पन्न होेने लगता है।

गोमेद रत्न से लाभ व उपयोगिताएं:-
– प्रेत सम्बंधित बाधा अर्थात किसी नकारात्मक शक्ति से किसी भी प्रकार का भय उत्पन्न हो रहा हो तो इस स्थिति में सुरक्षा के दृष्टिकोण से गोमेद रत्न अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
– राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय जातक के कार्य व प्रभावों के सिद्धि प्राप्ति हेतु यह रत्न अत्यंत प्रभावकारी माना गया है। जिसे धारण से शत्रु सामने नहीं टिकता।
– आर्थिक लाभ व पद प्रतिष्ठा में वृद्धि हेतु यह रत्न अत्यंत उपयोगी माना गया है।
– अचानक बनते काम में व्यवधान या रूकावटें उत्पन्न होने से हर बार निराशा हाथ लगे तो इस स्थिति में गोमेद रत्न धारण करना लाभकारी माना जाता है।
– गृह कलह, पति-पत्नी के मन मुटाव, घर में दिल न लगे या मन उखड़ा-उखड़ा सा लगे तो इन कष्टों के निराकरण हेतु यह रत्न अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है।

गोमेद रत्न के धारण करने हेतु आधारभूत सिद्धांत:-
– राहु ग्रह से बुध, शुक्र व शनि के नैसर्गिक मित्रों के फलस्वरूप, वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुंभ राशि व लग्न के जातक इस रत्न को धारण कर सकते हैं।
– लग्नेश का मित्र होकर राहु जन्म कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, पंचम, सप्तम व नवम भाव में स्थित हो तो ऐसी स्थिति में इस रत्न को धारण किया जा सकता है।
– द्वितीय व एकादश भाव में स्थित राहु यदि लग्नेश का मित्र हो तो धन व जायदाद सम्बधित लाभ के हेतु इस रत्न को धारण किया जा सकता है।
– यदि जातक की राशि व लग्न मेष, कर्क, सिंह व वृश्चिक हो तो गोमेद धारण करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिये।
– मीन व धनु लग्न के जातक कुछ विशेष परिस्थिति में ज्योतिष परामर्श से गोमेद रत्न धारण कर सकते हैं।
– जन्म कुंडली में राहु षष्ठ, अष्टम व द्वादश भाव में स्थित हो तो गोमेद रत्न धारण करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिये।
– कुंडली में राहु कारक अवस्था में स्थित होकर सूर्य से युक्त या दृष्ट अथवा सिंह राशि में स्थित हो तो राहु की महादशा व अन्तर दशा में इस रत्न को धारण किया जा सकता है।
– यदि कुंडली में राहु कारक होकर मेष, कर्क, वृश्चिक, धनु व मीन राशि में स्थित हो तो राहु की महादशा व अंतर्दशा में गोमेद रत्न को धारण करना श्रेष्ठकर माना जाता है।
– यदि जातक का जन्म आद्र्रा, स्वाती व शतभिषा नक्षत्रों में हुआ हो तो उनके लिये इस रत्न को धारण करना श्रेष्ठकर होगा।

गोमेद रत्न को धारण करने हेतु विधि:-
सबसे पहले तो किसी अनुभवी विद्वान से अपनी कुंडली की जांच करवाकर यह पता लगा लें कि आपके लिए गोमेद धारण करना कैसा रहेगा। यदि आपको गोमेद धारण करने की सलाह दी जाती है तो अंगूठी में पाँच रत्ती से अधिक वजन के गोमेद रत्न को चाँदी अथवा अष्टधातु की अंगूठी में जड़वा लें, फिर इस चाँदी अथवा अष्टधातु से निर्मित अंगूठी को किसी स्वाती नक्षत्र के शनिवार की शाम अपने दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में धारण करें।

रत्न विज्ञान के अनुसार रत्न धारण करने से अवश्य भाग्य लाभ मिलता है। यदि आप कुंडली दिखाकर रत्न परामर्श लेना चाहते हैं तो सम्पर्क कर सकते हैं :- 09810143516, 09155669922

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