ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र हमें कर्मशील बनने में विरोधी नहीं है, अपितु ये प्रारब्ध को कर्म का ही परिणाम मानता है। और जन्म के ग्रहों के आधार पर समय-समय पर मिलने वाले अवसरों का ज्ञान करवाकर भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए सार्थक कर्म करने की सलाह देता है। अतः भविष्य को सुधारना है तो, वर्तमान को सुधारो, अच्छे कर्म करो। संसार में आए हो तो निस्वार्थ भाव से सबकी सेवा करो, क्योंकि तुम अपने कर्मो के भोक्ता स्वयं हो, स्वयं को उसका जिम्मेदार या करता मानो। सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु तो केवल तुम्हारे द्वारा किए गए कर्मफल की सूचना देते हैं।

अपने द्वारा किए हुए अच्छे या बुरे कर्म जब परिपक्व हो जाते हैं (फल प्राप्त होने का समय जब आ जाता है) तो ग्रह-नक्षत्र निमित बनकर फलीभूत होने लगते हैं। इसी लिए जीवन में सुख-शांति प्राप्त करने और भविष्य सुधारने के लिए ज्योतिष शास्त्र की सहायता लेनी ही चाहिए।

Dr.R.B.Dhawan (Top Astrologer in Delhi)

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