सोमवती अमावस्या

Dr.R.B.Dhawan

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सोमवती अमावस्या अर्थात्- सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को ही सोमवती अमावस्या कहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार सोमवती अमावस्या बड़े भाग्य से पड़ती है। पांडव सोमवती अमावस्या के लिए तरसते रहे, लेकिन उनके जीवन में कभी सोमवती अमावस्या पड़ी ही नहीं। सोमवार का दिन भगवान चन्द्रमा को समर्पित दिन है। भगवान चन्द्रमा को ज्योतिष शास्त्र में मन का कारक माना गया है। अत: इस दिन अमावस्या पड़ने का अर्थ है कि यह दिन मन सम्बन्धी दोषों के समाधान के लिये अति उत्तम है। चूंकि हमारे शास्त्रों में चन्द्रमा को ही समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों का कारक माना जाता है, अत: पूरे वर्ष में एक या दो बार पड़ने वाले इस दिन का बहुत महत्व है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु की कामना के लिए व्रत का विधान है।

सोमवती अमावस्या एक पर्व के रूप में जाना और माना जाता है, यह कल्याणकारी पर्वो में से एक है, लेकिन सोमवती अमावस्या को अन्य अमावस्याओं से अधिक पुण्य कारक मानने के पीछे भी शास्त्रीय और पौराणिक कारण हैं। सोमवार को भगवान शिव और चंद्रमा का दिन कहा गया है। सोम यानि चंद्रमा! अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का सोमांश यानि अमृतांश सीधे पृथ्वी पर पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या पर चंद्रमा का अमृतांश पृथ्वी पर सबसे अधिक मात्रा में पड़ता है।

अमावस्या अमा+वस्या दो शब्दों से मिलकर बना है। शिव महापुराण में इस संधि विच्छेद को भगवान शिव ने माता पार्वती को समझाया था। क्योंकि सोम को अमृत भी कहा जाता है, अमा का अर्थ है एकत्र करना और वस्या वास को कहा गया है। यानि जिसमें सब एक साथ वास करते हों वह अमावस्या अति पवित्र सोमवती अमावस्या कहलाती है। यह भी माना जाता है की सोमवती अमावस्या में भक्तों को अमृत की प्राप्ति होती है।

निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। हिन्दु धर्म शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन पीपल कि सेवा-पूजा, परिक्रमा का अति विशेष महत्व है।

शास्त्रों के अनुसार में पीपल की छाया से, स्पर्श करने से और प्रदक्षिणा करने से समस्त पापों का नाश, अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति और आयु में वृद्धि होती है।

पीपल के पूजन में दूध, दही, मीठा,फल,फूल, जल,जनेऊ जोड़ा चढ़ाने और दीप दिखाने से भक्तों कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहते हैं कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव जी तथा अग्रभाग में भगवान ब्रह्मा जी का निवास है। इसलिए सोमवार को यदि अमावस्या हो तो, पीपल के पूजन से अक्षय पुण्य, लाभ तथा सौभाग्य की वृद्धि होती है।

इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है, और प्रत्येक परिक्रमा में कोई भी एक मिठाई, फल या मेवा चढ़ाने से विशेष लाभ होता है । प्रदक्षिणा के समय 108 फल अलग रखकर समापन के समय वे सभी वस्तुएं ब्राह्मणों और निर्धनों को दान करें। इस प्रक्रिया को कम से कम तीन सोमवती अमावस्या तक करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है और समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस प्रक्रिया से पितृदोष का भी समाधान होता है।

इस दिन जो स्त्री तुलसी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर अपनी माँग में लगाती है, वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है। आज के दिन महिलाएँ कपड़ा, गहना, बरतन, अनाज अथवा कोई भी खाने की वस्तु वस्तुयें दान कर सकती हैं, जिससे उनके जीवन में शुभता आती है, समाज में उनके परिवार का नाम होता है, यश मिलता है ।

जिन जातकों की जन्मपत्रिका में घातक कालसर्प दोष है, वे लोग यदि सोमवती अमवस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा करके उन्हे नदीं में प्रवाहित कर दें, भगवान भोले भण्डारी पर कच्चा दूध चढ़ायें, पीपल पर मीठा जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करें, धूप दीप जलाएं, ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करें तो, उन्हें निश्चित ही कालसर्प दोष से छुटकारा मिलता है।

सोमवती अमावस्या को अत्यंत पुण्य तिथि माना जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन किये गए किसी भी प्रकार के उपाय शीघ्र ही फलीभूत होते हैं। सोमवती अमावस्या के दिन उपाय करने से मनुष्यों को सभी तरह के शुभ फल प्राप्त होते हैं, अगर उनको कोई कष्ट है तो, उसका शीघ्र ही निराकरण होता है, और उस व्यक्ति तथा उसके परिवार पर आने वाले सभी तरह के संकट टल जाते हैं।

इस दिन जो मनुष्य व्यवसाय में परेशानियां से जूझ रहे हों, वे पीपल वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दिया जलाकर और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:। मंत्र का जाप करें तो, उनके व्यवसाय में आ रही समस्त रुकावटें दूर हो जायेंगी। सोमवती अमावस्या के पर्व पर अपने पितरों के निमित्त पीपल का वृक्ष लगाने से जातक को सुख-सौभाग्य, संतान, पुत्र, धन की प्राप्ति होती है, और उसके समस्त पारिवारिक क्लेश समाप्त हो जाते हैं।

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य निश्चय ही समृद्ध, स्वस्थ और सभी दुखों से मुक्त होगा, ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।

इस दिन पवित्र नदियों, तीर्थों में स्नान, ब्राह्मण भोजन, गौदान, अन्नदान, वस्त्र, स्वर्ण आदि दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशिष्ट महत्त्व है। इस दिन यदि गंगा जी जाना संभव न हो तो प्रात:काल किसी नदी या सरोवर आदि में स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करें।

सोमवार भगवान शिव जी का दिन माना जाता है और सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिव जी को समर्पित होती है। इसलिए इस दिन भगवान शिव कि कृपा पाने के लिए शिव जी का अभिषेक करना चाहिए, या प्रभु भोले भंडारी पर बेलपत्र, कच्चा दूध ,मेवे, फल, मीठा, जनेऊ जोड़ा आदि चढ़ाकर ॐ नम: शिवाय का जाप करने से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है।

मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन सुबह-सुबह नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी भी शिव मंदिर में जाकर सवा किलो साफ चावल अर्पित करते हुए भगवान शिव का पूजन करें। पूजन के पश्चात यह चावल किसी ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमवस्या पर शिवलिंग पर चावल चढ़ाकर उसका दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है, माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

शास्त्रों में वर्णित है कि सोमवती अमावस्या के दिन उगते हुए भगवान सूर्य नारायण को गायत्री मंत्र उच्चारण करते हुए अर्घ्य देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होगी। यह क्रिया आपको अमोघ फल प्रदान करती है ।

सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी के पौधे की श्री हरि-श्री हरि अथवा ॐ नमो नारायण का जाप करते हुए परिक्रमा करें, इससे जीवन के सभी आर्थिक संकट निश्चय ही समाप्त हो जाते हैं।

जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, वह यदि गाय को दही और चावल खिलाएं तो उन्हें अवश्य ही मानसिक शांति प्राप्त होगी। इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना एवं दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन स्वास्थ्य, शिक्षा, कानूनी विवाद, आर्थिक परेशानियां और पति-पत्नी सम्बन्धी विवाद के समाधान हेतु किये गये उपाय अवश्य ही सफल होते है ।

इस दिन जो व्यक्ति धोबी, धोबन को भोजन कराता है, सम्मान करता है, दान दक्षिणा देता है, उसके बच्चो को कापी किताबे, फल, मिठाई, खिलौने आदि देता है, उसके सभी मनोरथ अवश्य ही पूर्ण होते हैं।

इस दिन ब्राह्मण, भांजा और ननद को फल, मिठाई या खाने की सामग्री का दान करना बहुत ही उत्तम फल प्रदान करता है।

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गायत्री मंत्र

गायत्री मंत्र:-

Dr.R.B.Dhawan

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कुछ मंत्र ऐसे भी होते हैं, जिनके जपने से तत्काल हमारे संकट दूर हो जाते हैं, परंतु इन तत्कालिक लाभ देने वाले मंत्रों का प्रभाव स्थाई नहीं होता। दूसरी ओर वैदिक मंत्र हैं, जो दीर्घकाल में सिद्ध होते हैं, और इनका प्रभाव स्थाई बना रहता है। इसी लिसे विद्वानों ने बार-बार कहा है कि वैदिक मंत्रों में अपार शक्ति है। आइए जानें अलग-अलग देवताओं के अलग-अलग मंत्रों की शक्ति के बारे में। धर्मग्रंथों के अनुसार आत्मबल सफलता का मुख्य आधार है, मन की इच्छाएं पूरी करने के लिए इष्टसिद्धि बहुत आवश्यक है, इष्टसिद्धि का अर्थ है कि मनुष्य जिस देव शक्ति के लिए श्रद्धा और आस्था मन में बना लेता है, उस देवता से जुड़ी सभी शक्तियां, प्रभाव और तेज उसे मिलने लगते हैं।

इष्टसिद्धि मे मां गायत्री का ध्यान सफलता प्रदायक होता है। गायत्री उपासना के लिए गायत्री मंत्र बहुत ही चमत्कारी और शक्तिशाली माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र में 24 अक्षर हैं, गायत्री मंत्र के ये 24 अक्षर 24 महाशक्तियों के प्रतीक हैं। एक गायत्री के महामंत्र द्वारा इन 24 देवशक्तियों का सानिध्य प्राप्त हो जाता है।

24 देव शक्तियों के ऐसे 24 चमत्कारी गायत्री मंत्र मे से, जो देवी-देवता आपके इष्ट है, उनका विशेष गायत्री मंत्र जपने से चमत्कारी फल प्राप्त होगा। शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व भौतिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए गायत्री उपासना सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। गायत्री ही वह शक्ति है जो पूरी सृष्टि की रचना, स्थिति या पालन और संहार का कारण है। वेदों में गायत्री शक्ति ही प्राण, आयु, शक्ति, तेज, कीर्ति और धन देने वाली मानी गई है। गायत्री मंत्र को महामन्त्र कहा गया है, जो शरीर की कई शक्तियों को चैतन्य करता है।

इष्टसिद्धी से मनचाहा कार्य बनाने के लिए गायत्री मंत्र के 24 अक्षरो के हर देवता के विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए।

1. श्रीगणेश – कठिन या जटिल कार्यों में सफलता, रुकावटों को दूर करने, बुद्धि लाभ के लिए इस गणेश गायत्री मंत्र का स्मरण करना चाहिए –

ॐ एकदृंष्ट्राय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात्।

2. नृसिंह – शत्रु की शत्रुता को हराने, बहादुरी, भय व दहशत दूर करने, पुरुषार्थी बनने व किसी भी आक्रमण से बचने के लिए नृसिंह गायत्री प्रभावशाली साबित होती है –

ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह प्रचोदयात्।

3. विष्णु – पालन-पोषण की क्षमता को बढ़ाने या किसी भी तरह से सबल बनने के लिए विष्णु गायत्री का महत्व है –

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।

4. शिव – दायित्वों व कर्तव्यों को लेकर दृढ़ बनने, अमंगल का नाश व शुभता को बढ़ाने के लिए शिव गायत्री मंत्र प्रभावी माना गया है –

ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।

5. कृष्ण – सक्रियता, समर्पण, निस्वार्थ व मोह से दूर रहकर कार्य करने की शक्ति, खूबसूरती व सरल स्वभाव की चाहत को कृष्ण गायत्री मंत्र पूरी करता है –

ॐ देवकीनन्दाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।

6. राधा – प्रेम भाव को बढ़ाने व द्वेष या घृणा को दूर रखने के लिए राधा गायत्री मंत्र का स्मरण लाभ देता है

ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्।

7. लक्ष्मी – मान-सम्मान, आर्थिक समृद्धि, पद, यश व भौतिक सुख-सुविधाओं की चाहत लक्ष्मी गायत्री मंत्र शीघ्र पूरी कर देता है –

ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।

8. अग्रि – शारीरिक बल बढ़ाने, प्रभावशाली व होनहार बनने के लिए अग्निदेव का स्मरण अग्नि गायत्री मंत्र से करना शुभ होता है-

ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।

9. इन्द्र – संयम के द्वारा बीमारियों, हिंसा के भाव को रोकने व भूत-प्रेत या अनिष्ट से रक्षा में इन्द्र गायत्री मंत्र प्रभावशाली माना गया है –

ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात्।

10. सरस्वती – बुद्धि व विवेक, दूरदर्शिता, चतुराई से सफलता मां सरस्वती गायत्री मंत्र से मिलती है –

ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्।

11. दुर्गा – विघ्नों के नाश, दुर्जनों व शत्रुओं को परास्त करने व अहंकार के नाश के लिए दु्र्गा गायत्री मंत्र का महत्व है-

ॐ गिरिजायै विद्महे शिव पत्नीय धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्।

12. हनुमानजी – निष्ठावान, भरोसेमंद, संयमी, शक्तिशाली, निडर व दृढ़ संकल्पित बनने के लिए हनुमान गायत्री मंत्र को अचूक माना गया है –

ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो मारुतिः प्रचोदयात्।

13. पृथ्वी – पृथ्वी गायत्री मंत्र सहनशील बनाने वाला, इरादों को मजबूत करने वाला व क्षमाभाव बढ़ाने वाला होता है –

ॐ पृथ्वी देव्यै विद्महे सहस्त्र मूर्त्यै धीमहि तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात्।

14. सूर्य – निरोगी बनने, लंबी आयु, उन्नति व भीतर के दोषों का शमन करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र प्रभावी माना गया है –

ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य्यः प्रचोदयात्।

15. राम – धर्म पालन, मर्यादा, स्वभाव में विनम्रता, मैत्री भाव की चाहत राम गायत्री मंत्र से पूरी होती है –

ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्।

16. सीता – सीता गायत्री मंत्र मन, वचन व कर्म से विकारों को दूर कर पवित्र करता है। साथ ही स्वभाव मे भी मिठास घोलता है –

ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि तन्नो सीता प्रचोदयात्।

17. चन्द्रमा – काम, क्रोध, लोभ, मोह, निराशा व शोक को दूर कर शांति व सुख की चाहत चन्द्र गायत्री मंत्र से पूरी होती है –

ॐ क्षीरपुत्रायै विद्महे अमृततत्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्।

18. यम – मृत्यु सहित हर भय से छुटकारा, समय को अनुकूल बनाने व आलस्य दूर करने के लिए यम गायत्री मंत्र प्रभावशाली होता है –

ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो यमः प्रचोदयात्।

19. ब्रह्मा – किसी भी रूप में सृजन शक्ति व रचनात्कमता बढ़ाने के लिए ब्रह्मा गायत्री मंत्र मंगलकारी होता है –

ॐ चतु्र्मुखाय विद्महे हंसारुढ़ाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।

20. वरुण – दया, करुणा, कला, प्रसन्नता, सौंदर्य व भावुकता की कामना वरुण गायत्री मंत्र पूरी करता है –

ॐ जलबिम्बाय विद्महे नीलपुरुषाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्।

21. नारायण – चरित्रवान बनने, महत्वकांक्षा पूरी करने, अनूठी खूबियां पैदा करने व प्रेरणास्त्रोत बनने के लिए नारायण गायत्री मंत्र शुभ है –

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो नारायणः प्रचोदयात्।

22. हयग्रीव – मुसीबतों को पछाड़ने, बुरे वक्त को टालने, साहसी बनने, उत्साह बढ़ाने व मेहनती बनने की कामना ह्यग्रीव गायत्री मंत्र पूरी करता है –

ॐ वाणीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात्।

23. हंस – यश, कीर्ति पाने के साथ संतोष व विवेक शक्ति जगाने के लिए हंस गायत्री मंत्र प्रभावशाली होता है –

ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि तन्नो हंसः प्रचोदयात्।

24. तुलसी – सेवा भावना, सच्चाई को अपनाने, सुखद दाम्पत्य जीवन, शांति व परोपकारी बनने की चाहत तुलसी गायत्री मंत्र पूरी करता है –

ॐ श्री तुलस्यै विद्महे विष्णु प्रियायै धीमहि तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।

ये 24 देवशक्तियां जाग्रत, आत्मिक और भौतिक शक्तियों से संपन्न मानी गई है।

—– गायत्री महाविज्ञान से ——

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