ज्योतिष रोग और उपाय

Dr.R.B.Dhawan

(Top Astrologer in Delhi, best Astrologer in Delhi)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर बीमारी का समबन्ध किसी न किसी ग्रह से है, जो आपकी कुंडली में या तो कमजोर है, या फिर दुसरे ग्रहों से बुरी तरह पीड़ित है। यहाँ इस लेख में मैं सभी रोगों की चर्चा नहीं कर पाऊंगा, इसके लिए मेरी पुस्तक “रोग एवं ज्योतिष” का अध्ययन करने की सलाह दूंगा। यहां केवल सामान्य रोग जो आजकल बहुत से लोगों को हैं, उन्ही की चर्चा संक्षेप में करने की कोशिश करता हूँ। यदि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है तो, आज धनवान कोई नहीं है, हर किसी को कोई न कोई रोग होता ही है। हर व्यक्ति के शरीर की संरचना अलग होती है। किसे कब क्या कष्ट होगा? यह तो डाक्टर भी नहीं बता सकता, परन्तु ज्योतिष इसकी पूर्वसूचना अवश्य दे देता है कि जातक कब और किस रोग से पीड़ित हो सकता है, या क्या व्याधि आपको शीघ्र प्रभावित करने वाली है। आईये ग्रहों की कमजोर स्थिति से कौन कौन से रोग हो सकते हैं जाने :-

सूर्य से संबंधित रोग :-

सूर्य ग्रहों का राजा है, इसलिए यदि सूर्य आपका बलवान है तो बीमारियाँ कुछ भी हों आप कभी परवाह नहीं करेंगे, क्योंकि आपकी आत्मा बलवान होगी, और आप में आत्मबल भरपूर होगा। आप शरीर की मामूली व्याधियों की परवाह नहीं करेंगे। परन्तु सूर्य अच्छा नहीं है, कमजोर है तो, सबसे पहले आपके बाल झड़ेंगे, सर में दर्द अक्सर होगा और आपको अक्सर दर्द-निवारक का सहारा लेना ही पड़ेगा।

चन्द्रमा से सम्बन्धित रोग :-

चन्द्रमा संवेदनशील लोगों का अधिष्ठाता ग्रह है। यदि चन्द्रमा दुर्बल हुआ तो मन कमजोर होगा, और जातक भावुक अधिक होगा, कठोरता से तुरंत प्रभावित हो जाता है, और उसमें सहनशक्ति भी कम होगी। इसके बाद सर्दी जुकाम और खांसी कफ जैसी व्याधियों से शीग्र प्रभावित हो जायेगा, एसे लोगों को सलाह है कि संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में न आयें क्योंकि उनको भी संक्रमित होते देर नहीं लगेगी। चन्द्रमा अधिक कमजोर होने से नजला से पीड़ित होंगे, चन्द्रमा की वजह से नर्वस सिस्टम भी प्रभावित होता है।

मंगल से सम्बन्धित रोग :-

मंगल रक्त में ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, परन्तु जिनका मंगल कमजोर होता है, रक्त की बीमारियों के अतिरिक्त जोश की कमी होगी। ऐसे व्यक्ति हर काम को धीरे-धीरे करेंगे, आपने देखा होगा कुछ लोग हमेशा सुस्त दिखाई देते हैं, और हर काम को भी उस ऊर्जा से नहीं कर पाते, अधिक खराब मंगल से चोट चपेट और एक्सीडेंट आदि का खतरा भी बना रहता है।

बुध से सम्बन्धित रोग :-

अच्छा बुध वाक्-चातुर्य और व्यक्ति को चालाक बनाता है, और कमजोर बुध बुद्धू या धूर्त बनाता है, आज के समय में यदि आप में वाक्-चातुर्य नहीं है तो दुसरे लोग आपका हर दिन फायदा उठाएंगे। भोले भाले लोगों का बुध अवश्य कमजोर होता है। अधिक खराब बुध से व्यक्ति को एलर्जी व चमड़ी के रोग अधिक होते हैं, नर्वसनेस, साँस की बीमारियाँ बुध के दूषित होने से होती हैं। बेहद खराब बुध से व्यक्ति के फेफड़े खराब होने का भय रहता है। व्यक्ति हकलाता है तो भी बुध के कारण और गूंगा बहरापन भी बुध के कारण ही होता है।

बृहस्पति से सम्बन्धित रोग :-

बृहस्पति जातक को ज्ञान देता है, विद्वान बनाता है, बुद्धिमान बनता है, परन्तु पढ़े लिखे लोग यदि मूर्खों जैसा व्यवहार करें तो, समझ लीजिये कि इस व्यक्ति का बृहस्पति कुंडली में खराब है। बृहस्पति सोचने समझने की शक्ति को प्रभावित करता है, और व्यक्ति जडमति हो जाता है। इसके अतिरिक्त बृहस्पति कमजोर होने से पीलिया या पेट के अन्य रोग होते हैं। बृहस्पति यदि दुष्ट ग्रहों से प्रभावित होकर लग्न को प्रभावित करता है तो, मोटापा देता है। अधिकतर लोग जो शरीर से काफी मोटे होते हैं, उनकी कुंडली में गुरु की स्थिति कुछ ऐसी ही होती है।

शुक्र से सम्बन्धित रोग :-

शुक्र मनोरंजन तथा एशो-आराम का कारक ग्रह है। शुक्र स्त्री, यौन सुख, वीर्य और हर प्रकार के सुख और सुन्दरता का कारक ग्रह है। यदि शुक्र की स्थिति कमजोर हो तो, जातक के जीवन से सुख के साधन तथा मनोरंजन को समाप्त कर देता है। नपुंसकता या सेक्स के प्रति अरुचि का कारण अधिकतर शुक्र ही होता है। मंगल की दृष्टि या प्रभाव निर्बल शुक्र पर हो तो, जातक को ब्लड शुगर हो जाती है। इसके अतिरिक्त शुक्र के अशुभ होने से व्यक्ति के शरीर को बेडोल बना देता है। बहुत अधिक पतला शरीर या ठिगना कद शुक्र की अशुभ स्थिति के कारण होते हैं।

शनि से सम्बन्धित रोग :-

शनि दर्द या दुःख का करता ग्रह है, जितने प्रकार की शारीरिक व्याधियां हैं, उनके परिणामस्वरूप व्यक्ति को जो दुःख और कष्ट प्राप्त होता है, उसका कारक शनि होता है। शनि का प्रभाव दुसरे ग्रहों पर हो तो शनि उसी ग्रह से सम्बन्धित रोग देता है। शनि की दृष्टि सूर्य पर हो तो जातक कुछ भी कर ले सर दर्द कभी पीछा नहीं छोड़ता। चन्द्र पर हो तो जातक को नजला-जुकाम रहता है। मंगल पर हो तो, रक्त में न्यूनता या ब्लडप्रेशर, बुध पर हो तो नपुंसकता, गुरु पर हो तो मोटापा, शुक्र पर हो तो वीर्य के रोग या प्रजनन क्षमता को कमजोर करता है, और राहू पर शनि के प्रभाव से जातक को उच्च और निम्न रक्तचाप दोनों से पीड़ित होना पड़ता है। केतु पर शनि के प्रभाव से जातक को गम्भीर रोग होते हैं, परन्तु कभी रोग का पता नहीं चलता, और एक उम्र निकल जाती है, पर बीमारियों से जातक जूझता रहता है। दवाई असर नहीं करती, और अधिक विकट स्थिति में लाइलाज रोग शनि ही आकर देता है |

राहू से सम्बन्धित रोग:-

राहू एक रहस्यमय ग्रह है, इसलिए राहू से जातक को जो रोग होंगे वह भी रहस्यमय ही होते हैं। एक के बाद दूसरी तकलीफ राहू से ही होती है। राहू अशुभ हो तो जातक की दवाई चलती रहती है, और डाक्टर के पास आना जाना लगा रहता है। किसी दवाई से रिएक्शन या एलर्जी राहू से ही होती है। यदि डाक्टर पूरी उम्र के लिए दवाई निर्धारित कर दे तो वह राहू के अशुभ प्रभाव से ही होती है। वहम यदि एक बीमारी है तो यह राहू देता है। डर के मारे हार्ट-अटैक राहू से ही होता है। अचानक हृदय गति रुक जाना या स्ट्रोक राहू से ही होता है।

केतु से सम्बन्धित रोग :-

केतु का संसार अलग है। यह जीवन और मृत्यु से परे है। जातक को यदि केतु से कुछ होना है तो, उसका पता देर से चलता है, यानी केतु से होने वाली बीमारी का पता चलना मुश्किल हो जाता है। केतु थोडा सा खराब हो तो, फोड़े फुंसियाँ देता है, और यदि थोडा और खराब हो तो, घाव जो देर तक न भरे वह केतु की वजह से ही होता है। केतु मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखता है। ऊपरी असर या भूत-प्रेत बाधा केतु के कारण ही होती है। असफल इलाज के बाद दुबारा इलाज केतु के कारण आरंभ होता है।

नोट :- “रोग एवं ज्योतिष” इस सम्बन्ध में गम्भीरता से विचार करके अधिक से अधिक कुंडलियों का अध्ययन करने के पश्चात् यह किताब लिखी है। ज्योतिष के विद्यार्थियों को इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

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