गौरी-शंकर रुद्राक्ष Gori Shankar Rudraksh

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Dr.R.R.Dhawan – astrological consultant, top best astrologer in Delhi

Aacharya, shukracharya के अनुसार गौरी शंकर रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से परस्पर जुड़े दो रूद्राक्षों को ही गौरी-शंकर रूद्राक्ष कहा जाता है। गौरी-शंकर रूद्राक्ष gauri Shankar Rudraksha को भगवान् शिव तथा माता गौरी का स्वरूप माना जाता है, इसलिये इसका नाम गौरी शंकर रूद्राक्ष है। यह रूद्राक्ष हर प्रकार की सिद्धियों का दाता है। यह रूद्राक्ष एक मुखी तथा चैदह मुखी की तरह बहुत दुर्लभ तथा विशिष्ट रूद्राक्ष है। कुछ लोग इसे अर्धनारीश्वर रूद्राक्ष भी कहते हैं। यह सुख-शांति, विवाह, संतान, सात्विक शक्ति, धन-धान्य, वैभव, प्रतिष्ठा, दैवीय कृपा और स्थाई लक्ष्मी प्रदाता रूद्राक्ष है। इस gauri Shankar Rudraksha रूद्राक्ष को उपयोग में लाने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसमें द्विमुखी रूद्राक्ष के जैसे गुण होते हैं, ऐसी मान्यता है। गौरी-शंकर रूद्राक्ष में एक मुखी रूद्राक्ष और चैदह मुखी रूद्राक्ष दोनों की शक्तियाँ समाहित होती हैं। गौरी-शंकर को पति-पत्नी के बीच, पिता-पुत्र के बीच, या दो मित्रों के बीच सम्बन्ध सुधारने के लिये धारण करते हैं। विवाह के इच्छुक युवक-युवती इसे धारण करते हैं। सामंजस्य, आकर्षण, मंगल कामनाओं की सिद्धि में यह रूद्राक्ष बहुत सहायक है। गौरी-शंकर रूद्राक्ष gauri Shankar Rudraksha सर्वसिद्धि प्रदाता रूद्राक्ष कहा गया है। यह सात्विक शक्ति में वृद्धि करने वाला, मोक्ष प्रदाता है। महिलाओं के लिये गौरी-शंकर रूद्राक्ष सफल वैवाहिक जीवन के लिये लाभकारी माना गया है। यह रूद्राक्ष भगवान शिव और उमादेवी का संयुक्त प्रतिरूप होने के कारण वंशवृद्धि द्वारा सृष्टि का विकास करता है। अतः पारिवारिक शांति एवं एकजुटता के लिये श्रेष्ठ है। गुरू जी Dr.R.B.Dhawan का कहना है की जन्म पत्री में यदि दुःखदायी कालसर्प योग पूर्णरूप से अथवा आंशिक रूप से प्रकट होकर जीवन को कष्टमय बना रहा हो तो, व्यक्ति को अविलम्ब 8 मुखी 9 मुखी और गौरी-शंकर रूद्राक्ष gauri Shankar Rudraksha अर्थात तीनों ही रूद्राक्षों का संयुक्त बन्ध बनवाकर धारण करना चाहिये क्योंकि कालसर्प दोष केवल शिव कृपा से ही दूर होता है, और गौरी-शंकर रूद्राक्ष के साथ राहू एवं केतु के 8 एवं 9 मुखी रूद्राक्ष बन्ध निश्चित रूप से कालसर्प योग से पूर्णतः मुक्ति दिलाने में सर्वश्रेष्ट हैं। गौरी-शंकर रूद्राक्ष धारण करने से पुरूषों को स्त्री सुख प्राप्त होता है, तथा परस्पर सहयोग एवं सम्मान तथा प्रेम की वृद्धि होती है। यह रूद्राक्ष शिव-शक्ति के लिये उपयोगी माना गया है। यह बहुत दुर्लभ रूद्राक्ष है। परंतु shukracharya संस्थान में उपलब्ध है। इस से जीवन सर्वतोन्मुखी विकास की ओर अग्रसर होता है। संक्षेप में यह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को देने वाला चतुर्वर्ग प्रदाता रूद्राक्ष है, यह ध्यान में भी प्रबल सहायक है। सर्वाधिक गौरी-शंकर में कुल 1, 10 या 11 मुख होते हैं, ऐसे भी गौरी-शंकर है, जिनमें 11 मुख या फिर दोनों दानों में एक-एक मुख होता है। गौरी-शंकर कंठा जिसमें 33 बीज होते हैं, सन्यासी पहनते हैं, जिन्हें अपने ब्रह्यचर्य की रखा करनी होती है। अधिकांशतः लोग इसे पहनने की बजाय इसकी पूजा करते हैं। इसके 33 दानों के कंठे से निसृत ऊर्जा सामान्य व्यक्ति में वैराग्य की भावना पैदा करती है। गौरी शंकर रूद्राक्ष को पूजा स्थान के साथ-साथ तिजोरी, गल्ले, में स्थापित करते हैं। धारण करने के लिये इसे सोने या चांदी में मढ़वा लेना श्रेष्ठ है।

धारण करने के लिये मंत्र- ॐ ऐं हृीं युगलरूपिण्यै नमः। ॐ गौरी-शंकराभ्यां नमः।
चैतन्य मंत्र- ॐ ऐं हृीं क्लीं क्ष्म्यौं स्वाहा।। इस मंत्र से रूद्राक्ष को चैतन्य कर धारण करना चाहिये।
उपयोग- बड़े से बड़ा विघ्न इस रूद्राक्ष को धारण करने से समूल नष्ट होता है, मानसिक शारीरिक रोगों से पीड़ित पुरूषों/स्त्रियों के लिये ये रूद्राक्ष दिव्यौषधि की तरह काम करता है।

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रूद्राक्ष धारण के लाभ

Dr.R.B.Dhawan

(Top Astrologer in Delhi, best Astrologer in Delhi)

जब जब हम रूद्राक्ष के विषय में जानकारी चाहते हैं, तब तब कुछ शंकायें सामने आ खड़ी होती हैं, यह रुद्राक्ष असली है या नकली? रूद्राक्ष की जांच कैसे की जाये?

रूद्राक्ष के विषय में एक मिथक अधिक प्रचलित है :- “असली रूद्राक्ष को जल में डालने से वह डूब जाता है” रूद्राक्ष पानी में डालने पर वह डूब जाये तो असली अन्यथा नकली। वास्तव में यह परीक्षा है ही नहीं, यह परीक्षा मिथ्या है।

1. जो रूद्राक्ष का फल पूरा समय पेड़ पर नहीं रह पाता, पहले ही टूटकर गिर जाता है, एेसे फल की गुठली हल्की रह जाती है, और जो रूद्राक्ष अच्छी प्रकार पक कर गिरता वह रूद्राक्ष का दाना ठोस और भारी और कठोर रूद्राक्ष हो जाता है। इस प्रकार ठोस और भारी दाना पानी में नीचे बैठ जाता है। और जो दाना पूरा नहीं पक पाता वह हल्का रूद्राक्ष पानी में डालने पर तैर जाता है। इसलिए इस प्रक्रिया से रूद्राक्ष के पके या कच्चे होने का पता तो लग सकता है, परंतु असली या नकली होने का नहीं। हां कच्चा दाना हल्का रूद्राक्ष गुणवत्ता में इसलिये भी कमजोर होता है, क्योंकि यह पके दाने की तुलना में कम समय में टूट जाता है, अर्थात् इसकी कठोरता कम होने से इसकी आयु भी लम्बी नहीं होती। जबकि पूरा पका और भारी और कठोर दाना कच्चे दाने की तुलना में कहीं अधिक समय तक चलता है (शीघ्र टूटता नहीं)। इसी लिये इस का मूल्य भी कम पके रूद्राक्षों से दो-तीन गुना तक अधिक होता है। वैसे कम पके या अधिक पके रूद्राक्ष में से किसी को भी धारण किया जाये आध्यात्मिक लाभ दोनो से बराबर ही प्राप्त होता है।

2. तांबे का एक टुकड़ा नीचे रखकर उसके ऊपर रूद्राक्ष रखकर फिर दूसरा तांबे का टुकड़ा रूद्राक्ष के ऊपर रख दिया जाये और एक अंगुली से हल्के से दबाया जाये तो असली रूद्राक्ष नाचने लगता है। यह पहचान हमेशा प्रमाणिक है।

3. शुद्ध सरसों के तेल में रूद्राक्ष को डालकर 10 मिनट तक गर्म किया जाये तो असली रूद्राक्ष अधिक चमकदार हो जायेगा और यदि नकली (लकड़ी से बना रूद्राक्ष) है तो वह धूमिल हो जायेगा, या टूट जायेगा।

4. प्रायः गहरे रंग के रूद्राक्ष को अच्छा माना जाता है, और हल्के रंग वाले को नहीं। वास्तव में रूद्राक्ष का छिलका उतारने के बाद सभी रूद्राक्षों पर रंग चढ़ाया जाता है। बाजार में मिलने वाले रूद्राक्ष की मालाओं को पिरोने के बाद पीले रंग से रंगा जाता है। रंग कम होने से कभी-कभी हल्का रह जाता है। काले और गहरे भूरे रंग के दिखने वाले या फिर घिसे हुये रूद्राक्ष इस्तेमाल किए हुए हो सकते हैं।

5. नेपाली रूद्राक्षों में प्राकृतिक रूप से छेद होता है, नेपाली रूद्राक्ष बहुत शुभ माने जाते हैं। जबकि जावा या इन्डोनेशिया के ज्यादातर रूद्राक्षों में छेद करना पड़ता है। इंडोनेशिया के रूद्राक्षों का प्रभाव नेपाली की तुलना में कम शुभ माना जाता है।

6. नकली रूद्राक्ष के उपर उभरे पठार एकरूप हों तो वह नकली रूद्राक्ष है। असली रूद्राक्ष की उपरी सतह कभी भी एकरूप नहीं होगी। जिस तरह दो मनुष्यों के फिंगरप्रिंट एक जैसे नहीं होते, उसी प्रकार दो रूद्राक्षों के उपरी पठार समान नहीं होते। हां नकली रूद्राक्षों में कितनों के ही उपरी पठार समान होते हैं।

7. कुछ रूद्राक्षों पर शिवलिंग, त्रिशूल या सांप आदी बने होते हैं। यह प्राकृतिक रूप से नहीं बने होते बल्कि कुशल कारीगरी का नमूना होते हैं। अल्प मूल्य वाले रूद्राक्षों पर कलाकारी द्वारा यह आकृतियां बनाई जाती हैं।

8. कभी-कभी दो या तीन रूद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े होते हैं। इन्हें गौरी शंकर रुद्राक्ष या गौरी पाठ रूद्राक्ष कहते हैं। इनका मूल्य काफी अधिक होता है इस कारण इनके नकली होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है। कुशल कारीगर दो या अधिक रूद्राक्षों को मसाले से चिपकाकर इन्हें गौरी शंकर या गौरी पाठ रूद्राक्ष बना देते हैं।

9. कभी कभी पांच मुखी रूद्राक्ष के चार मुंहों को मसाला से बंद कर एक मुखी कह कर भी बेचा जाता है जिससे इनकी कीमत बहुत बढ़ जाती है। ध्यान से देखने पर मसाला भरा हुआ दिखायी दे जाता है। कभी-कभी पांच मुखी रूद्राक्ष को कुशल कारीगर और धारियां बना अधिक मुख का (7 या 8 मुख का) बना देते हैं। जिससे इनका मूल्य बढ़ जाता है।

10. प्रायः बेर की गुठली पर रंग चढ़ाकर उन्हें असली रूद्राक्ष की माला कहकर बेच दिया जाता है। रूद्राक्ष की मालाओं में बेर की गुठली का उपयोग बहुत किया जाता है।

11. रूद्राक्ष की पहचान का तरीका- एक कटोरे में पानी उबालें। इस उबलते पानी में 45 मिनट के लिए रूद्राक्ष डाल दें। कटोरे को चूल्हे से उतारकर ढक दें। दो चार मिनट बाद ढक्कन हटा कर रूद्राक्ष निकालकर ध्यान से देखें। यदि रूद्राक्ष में जोड़ लगाया होगा तो वह फट जाएगा। दो रूद्राक्षों को चिपकाकर गौरीशंकर रूद्राक्ष बनाया होगा या शिवलिंग, सांप आदी चिपकाए होंगे तो वह अलग हो जाएंगे। जिन रूद्राक्षों में सोल्यूशन भरकर उनके मुख बंद करे होंगे तो उनके मुंह खुल जाएंगे। यदि रूद्राक्ष प्राकृतिक तौर पर फटा होगा तो थोड़ा और फट जाएगा। बेर की गुठली होगी तो नर्म पड़ जाएगी, जबकि असली रूद्राक्ष में अधिक अंतर नहीं पड़ेगा। यदि रूद्राक्ष पर से रंग उतारना हो तो उसे नमक मिले पानी में डालकर गर्म करें उसका रंग हल्का पड़ जाएगा। वैसे रंग करने से रूद्राक्ष की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पडता है।

रूद्राक्ष कितने मुखी तक मिलते हैं :-

रूद्राक्ष एकमुखी से लेकर सत्ताईस मुखी तक पाए जाते हैं। रूद्राक्ष पर पड़ी धारियों के आधार पर ही इनके मुखों की गणना की जाती है। रूद्राक्ष एकमुखी से लेकर सत्ताईस मुखी तक पाए जाते हैं, जिनके अलग-अलग महत्व व उपयोगिता हैं।

1. एक मुखी रुद्राक्ष:- को साक्षात शिव का रूप माना जाता है। इस एक मुखी रुद्राक्ष द्वारा सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। तथा भगवान आदित्य का आशिर्वाद भी प्राप्त होता है।

2. दो मुखी रुद्राक्ष:- या द्विमुखी रुद्राक्ष शिव और शक्ति का स्वरुप माना जाता है,वइस अर्धनारीश्व का स्वरूप समाहित है तथा चंद्रमा सी शीतलता प्रदान होती है।

3. तीन मुखी रुद्राक्ष:- को अग्नि देव तथा त्रिदेवों का स्वरुप माना गया है। तीन मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, तथा पापों का शमन होता है।

4. चार मुखी रुद्राक्ष:- ब्रह्म स्वरुप होता है। इसे धारण करने से नर हत्या जैसा जघन्य पाप समाप्त होता है। चतुर्थ मुखी रुद्राक्ष धर्म, अर्थ काम एवं मोक्ष को प्रदान करता है।

5. पांच मुखी रुद्राक्ष:- कालाग्नि रुद्र का स्वरूप माना जाता है। यह पंच ब्रह्म एवं पंच तत्वों का प्रतीक भी है। पांच मुखी को धारण करने से अभक्ष्याभक्ष्य एवं परस्त्रीगमन जैसे पापों से मुक्ति मिलती है। तथा सुखों की प्राप्ति होती है।

6. छह मुखी रुद्राक्ष:- को साक्षात कार्तिकेय का स्वरूप माना गया है। इसे शत्रुंजय रुद्राक्ष भी कहा जाता है, यह ब्रह्म हत्या जैसे पापों से मुक्ति तथा एवं संतान देने वाला होता है।

7. सात मुखी रुद्राक्ष:- या सप्तमुखी रुद्राक्ष दरिद्रता को दूर करने वाला होता है। इस सात मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

8. आठ मुखी रुद्राक्ष:- को भगवान गणेश जी का स्वरूप माना जाता है। अष्टमुखी रुद्राक्ष राहु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति दिलाता है, तथा पापों का क्षय करके मोक्ष देता है।

9. नौ मुखी रुद्राक्ष:- को भैरव का स्वरूप माना जाता है। इसे बाईं भुजा में धारण करने से गर्भहत्या जेसे पाप से मुक्ति मिलती है। नवम मुखी रुद्राक्ष को यम का रूप भी कहते हैं। यह केतु के अशुभ प्रभावों को दूर करता है।

10. दस मुखी रुद्राक्ष:- को भगवान विष्णु का स्वरूप कहा जाता है। दस मुखी रुद्राक्ष शांति एवं सौंदर्य प्रदान करने वाला होता है। इसे धारण करने से समस्त भय समाप्त हो जाते हैं।

11. एकादश मुखी रुद्राक्ष:- साक्षात भगवान शिव का रूप माना जाता है। एकादश मुखी रुद्राक्ष को भगवान हनुमान जी का प्रतीक माना गया है, इसे धारण करने से ज्ञान एवं भक्ति की प्राप्ति होती है।

12. द्वादश मुखी रुद्राक्ष:- बारह आदित्यों का आशीर्वाद प्रदान करता है। इस बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान यह फल प्रदान करता है।

13. तेरह मुखी रुद्राक्ष:- को इंद्र देव का प्रतीक माना गया है इसे धारण करने पर व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।

14. चौदह मुखी रुद्राक्ष:- भगवान हनुमान का स्वरूप है। इसे धारण करने से व्यक्ति परमपद को पाता है।

15. पंद्रह मुखी रुद्राक्ष:- पशुपतिनाथ का स्वरूप माना गया है। यह संपूर्ण पापों को नष्ट करने वाला होता है।

16. सोलह मुखी रुद्राक्ष:- विष्णु तथा शिव का स्वरूप माना गया है। यह रोगों से मुक्ति एवं भय को समाप्त करता है।

17. सत्रह मुखी रुद्राक्ष:- राम-सीता का स्वरूप माना गया है, यह रुद्राक्ष विश्वकर्माजी का प्रतीक भी है, इसे धारण करने से व्यक्ति को भूमि का सुख एवं कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने का मार्ग प्राप्त होता है।

18. अठारह मुखी रुद्राक्ष:- को भैरव एवं माता पृथ्वी का स्वरूप माना गया है। इसे धारण करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

19. उन्नीस मुखी रुद्राक्ष:- नारायण भगवान का स्वरूप माना गया है यह सुख एवं समृद्धि दायक होता है।

20. बीस मुखी रुद्राक्ष:- को जनार्दन स्वरूप माना गया है। इस बीस मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति को भूत-प्रेत आदि का भय नहीं सताता।

21. इक्कीस मुखी रुद्राक्ष:- रुद्र स्वरूप है, तथा इसमें सभी देवताओं का वास है। इसे धारण करने से व्यक्ति ब्रह्महत्या जैसे पापों से मुक्त हो जाता है।

22. गौरी शंकर रुद्राक्ष:- यह रुद्राक्ष प्राकृतिक रुप से जुडा़ होता है शिव व शक्ति का स्वरूप माना गया है। इस रुद्राक्ष को सर्वसिद्धिदायक एवं मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। गौरी शंकर रुद्राक्ष दांपत्य जीवन में सुख एवं शांति लाता है।

23. गणेश रुद्राक्ष:- इस रुद्राक्ष को भगवान गणेश जी का स्वरुप माना जाता है। इसे धारण करने से ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। यह रुद्राक्ष विद्या प्रदान करने में लाभकारी है विद्यार्थियों के लिए यह रुद्राक्ष बहुत लाभदायक है।

24. गौरीपाठ रुद्राक्ष:- यह रुद्राक्ष त्रिदेवों का स्वरूप है। इस रुद्राक्ष द्वारा ब्रह्मा, विष्णु और महेश की कृपा प्राप्त होती है।

राशि के अनुसार रुद्राक्ष धारण :-

1. मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल है, इसलिए ऎसे जातक तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करें ।

2. वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र है । अतः इस राशि के जातकों के लिए छह मुखी रुद्राक्ष फायदेमंद होता है ।

3. मिथुन राशि के स्वामी ग्रह बुध है । इस राशि वालों के लिए चार मुखी रुद्राक्ष है ।

4. कर्क राशि के स्वामी ग्रह चंद्रमा है । इस राशि के लिए दो मुखी रुद्राक्ष लाभकारी है ।

5. सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य है । इस राशि के लिए एक या बारह मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा ।

6. कन्या राशि के स्वामी ग्रह बुध है । इनके लिए चार मुखी रुद्राक्ष लाभदायक है ।

7. तुला राशि के स्वामी ग्रह शुक्र है । इनके लिए छह मुखी रुद्राक्ष व तेरह मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा ।

8. वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगल है । इनके लिए तीन मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होगा ।

9. धनु राशि के स्वामी ग्रह (गुरु )वृहस्पति है। ऎसे जातकों के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष उपयोगी है ।

10. मकर राशि के स्वामी ग्रह शनि है । इनके लिए सात या चौदह मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा ।

11. कुंभ राशि के स्वामी ग्रह शनि है । इनके लिए सात चौदह मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होगा ।

12. मीन राशि के स्वामी ग्रह गुरु है । इस राशि के जातकों के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष उपयोगी होगा ।

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