सौभाग्य लक्ष्मी प्रयोग

सौभाग्य-लक्ष्मी दीपावली सिद्ध प्रयोग-2018

Dr.R.B.Dhawan (top best astrologer in delhi)

सौभाग्य लक्ष्मी उपनिषद में भगवान आदिनारायण देवताओं को सौभाग्यलक्ष्मी साधना का उपदेश देतु हुये कहते हैं- सौभाग्यलक्ष्मी स्थूल, सूक्ष्म एवं कारण रूप तीनों अवस्थाओं से परे तुरियस्वरूपा हैं। सभी मंत्रों को अपना आसन बनाकर उन पर विराजमान हैं। इस प्रकार सौभाग्यलक्ष्मी के इस महत्वपूर्ण यंत्र की परिभाषा और निर्माण की पूर्ण प्रक्रिया पूर्णतः समझाई है, उनका कहना है कि ऐसा महायंत्र निर्माण करना अत्यंत ही कठिन है, क्योंकि इस महायंत्र का निर्माण केवल एक विशेष मुहूर्त में ही सम्पन्न किया जाना चाहिये। और फिर सौभाग्यलक्ष्मी का सिद्ध यंत्र यदि साधक के पास होता है, तो वास्तव में ही वह समस्त भू-सम्पदा का स्वामी होता है, केवल मात्र घर में यंत्र रखने से ही उसे धर्म-अर्थ-काम, और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। यह यंत्र अन्धकार में प्रकाश की तरह है, मध्य रात्रि में सूर्य की तरह तेजस्वी है।

दीपावली के पर्व पर रात्रि काल में साधक अपने घर में पूजा स्थान में इस अद्वितीय महायंत्र की स्थापना कर सौभाग्यलक्ष्मी मंत्र से साधना करता है, तो वह साधक वास्तव में ही सौभाग्यशाली माना जाता है, सौभाग्यलक्ष्मी अवश्य उसके घर में निवास करती हैं, यह वास्तव में ही उसके घर में लक्ष्मी को आना ही पड़ता है, और जब तक वह महायंत्र घर में स्थापित होता है, तब तक उस घर में सौभाग्य सहित लक्ष्मी का निवास हमेशा बना रहता है।

दीपावली की रात्रि में मंत्रों द्वारा सिद्ध करके यह महायंत्र घर में स्थापित होने पर न केवल कर्ज, मिट जाता है, अपितु घर के लड़ाई झगड़े भी समाप्त हो जाते है, व्यापार में वृद्धि होने लगती है, आर्थिक उन्नति और राज्य से सम्मान प्राप्ति होती है, और उसके जन्म जन्म के दुःख और दारिद्रय समाप्त हो जाते हैं। इस महायंत्र की जितनी प्रशंसा सौभाग्यलक्ष्मी उपनिषद में की है, और आगे के ऋषियों ने इस महायंत्र की जितनी विशेषतायें बतलाई हैं, वे अपने आप में अन्यतम है वशिष्ठ, विश्वामित्र, आदि ऋषियों ने इस प्रकार के महायंत्र को कामधेनु की संज्ञा दी है। गौतम और कणाद जैसे ऋषियों ने इस महायंत्र को कल्पवृक्ष के समान फलदायक बताया है। स्वयं शंकराचार्यजी ने इस महायंत्र को स्थापित कर, इससे संबंधित मंत्र सिद्धि के द्वारा असीम लक्ष्मी भण्डार प्राप्त कर जीवन की पूर्णता प्राप्त की थी। स्वयं तंत्रगुरू गोरखनाथ ने स्वीकार किया है, कि इस यंत्र में तांत्रिक और मांत्रिक दोनों विधियों का पूर्ण रूप से समावेश है। यह महायंत्र अपने आप में देवताओं के समान फलदायक है। आगे के विद्वानों ने भी यह स्वीकार किया है कि यदि साधक इस साधना को सम्पन्न कर लें और घर में ऐसा महायंत्र स्थापित कर लें, तो फिर उसके जीवन में किसी प्रकार की न्यूनता नहीं रह सकती, जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रह सकता, उसके जीवन में असफलता नहीं रह सकती।

महायंत्र की रचना- इस महायंत्र की रचना गुरुपुष्य योग में शुद्ध चांदी के पतरे पर करनी चाहिये। ऊपर की पंक्ति में 22 अंक से आरम्भ कर अंतिम पंक्ति में 4 अंक तक उत्कीर्ण करना चाहिये। और फिर रविपुष्य योग में इस यंत्र की प्राणप्रतिष्ठा करनी चाहिए।

दीपावली सिद्ध प्रयोग- 2018 :- यद्यपि शास्त्रों में बताया गया है, कि एक बार ऐसा महायंत्र सिद्ध करके स्थापित होने के बाद इससे संबंधित किसी भी प्रकार की साधना करने की आवश्यक नहीं होती। यह प्रयोग केवल एक ही दिन का है, जो कि दीपावली की रात्रि में सम्पन्न किया जाता है। सबसे पहले साधक दीपावली के दिन सांयकाल स्नानादि से शुद्ध होकर अपने पूजा स्थान में बैठ जाये और सामने एक लकड़ी के तख्ते पर पीला रेशमी वस्त्र बिछा कर उस पर प्राणप्रतिष्ठित महायंत्र स्थापित कर फूल, अक्षत्, नवैद्य, धूप-दीप से इसकी पूजा करें। पूजा के उपरांत इस महायंत्र को स्थापित कर दें। इससे पहले एक अलग पात्र में इस महायंत्र को जल से तथा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराकर इसे पीले रेशमी वस्त्र पर स्थापित कर दें, और केसर से इस महायंत्र के बाहर नौ बिन्दियां लगायें जो नव निधि की प्रतीक हैं, इसके बाद हाथ में जल ले कर विनियोग करे-

विनियोग-
अस्य श्री सौभाग्यलक्ष्मी मंत्रस्य भृगु ऋषिः आद्यादि श्री महालक्ष्मी देवता, नीचृद्रगायत्रीछन्दांसि, श्रीं बीजम् श्रीं शक्तिः, श्रीं कीलकम् श्री महालक्ष्मी प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।

इसके बाद साधक हाथ में जल ले कर संकल्प करें कि मैं अमुक गौत्र अमुक पिता का पुत्र, अमुक नाम का साधक दीपावली पर्व पर भगवती सौभाग्यलक्ष्मी को नवनिधियों के साथ अपने घर में स्थापित करने के लिये यह सिद्ध प्रयोग सम्पन्न कर रहा हूं, ऐसा कह कर हाथ में लिया हुआ जल भूमि पर छोड़ दे, और फिर प्राण प्रतिष्ठित यंत्र के सामने शुद्ध घृत के पांच दीपक लगावे, सुगन्धित अगरबत्ती प्रज्वलित करें, गुलाब तथा संभव हो तो कमल का भी एक पुष्प चढावें, थोडे चावल, रोली, कलावा, पान तथा साबुत सुपारी चढाकर पूजा करें, और दूध के बने हुए प्रसाद का नैवेद्य समर्पित करें, इसके बाद हाथ में जल लेकर अंगन्यास करें-

अंगन्यास-
श्रां हृदयायनमः। श्रीं शिरसे स्वाहा। श्रूं शिखाये वषट्। श्रैं कवचाय हुम्। श्रौं नेत्रत्रयाय वौष्ट्। श्रःअस्त्राय फट्। इसके बाद हाथ जोड़ कर ध्यान का पाठ करें-

ध्यान-
भुयादभुयो द्विपद्मभयवरदकरा तत्पकार्तस्वराभ शुभ्राभ्राभेभयुग्मद्वयकर धृतकुम्भादिभरासिच्यमाना।
रक्तौघाबद्धमौलिर्विमलतरदुकूलार्तवालेपनाढया पद्मक्षी पद्मनाभोरसि कृतवसतिः पद्मगा श्रीः श्रियै नः।।

इसके बाद साधक सिद्ध सौभाग्यलक्ष्मी माला (कमलगट्टे की सिद्ध माला) से एकाक्षरी मंत्र की 51 माला जप करें, इसमें सौभाग्यलक्ष्मी माला’ का ही प्रयोग होता है। एकाक्षरी महामंत्र- ‘श्रीं’ 51 माला मंत्र जप के बाद साधक सौभाग्यलक्ष्मी की आरती करें और यंत्र को प्रातः अपनी तिजोरी में रख दें या पूजा स्थान में रहने दें, तथा प्रसाद को घर के सभी सदस्यों में वितरित कर दे, इस प्रकार यह साधना सम्पन्न होती है जो कि वर्ष की श्रेष्ठतम और अद्वितीय साधना कही जाती है।

साधना सामग्री में:- एक प्राणप्रतिष्ठित सौभाग्यलक्ष्मी यंत्र जो कि शुद्ध चांदी पर उत्कीर्ण तथा प्राणप्रतिष्ठित हो और सौभाग्यलक्ष्मी माला (कमलगट्टे की सिद्ध माला) की आवश्यकता होगी।

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यदि आप ‘सौभाग्य लक्ष्मी प्रयोग’ सम्पन्न नहीं कर सकते, अथवा आप को साधना पद्धति जटिल लगती है, तब एेसी स्थिति में आप दीपावली की रात्रि सिद्ध मुहूर्त में सिद्ध किया गया ‘सौभाग्य लक्ष्मी यंत्र’ तथा कमलगट्टे की माला हमारे कार्यालय में सम्पर्क करके आर्डर कर सकते हैं। ——————————————————————————–

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