दो मुखी रुद्राक्ष, 2 Mukhi Rudraksh

दो मुखी रूद्राक्ष, 2 Mukhi Rudraksh Nepal, 2 Mukhi Rudraksh Original Nepal,

Dr.R.B.Dhawan,Astrological Consultant, specialist: marriage problems, top best astrologer in delhi

असुराचार्य shukracharya का कथन है कि- दो मुखी रूद्राक्ष अर्धनारिश्वर स्वरूप है, यह शिव तथा शक्ति दोनो का संयुक्त रूप है। इसे धारण करने से भगवान शिव तथा पार्वती दोनों ही प्रसन्न होते हैं। दो मुखी रूद्राक्ष गोहत्या के पाप से मुक्ति दिलाता है, तथा यह मन और मस्तिष्क को सन्तुलित रखता है, Dr.R.B.Dhawan अपने अनुभवों के आधार पर कहते हैं- इसको धारण करने से मनुष्य की बुद्धि सक्रिय होती है, तथा घर में हर प्रकार की सुख-सुविधा उपलब्ध होती है। इसको धारण करने से पति-पत्नी में एकात्मय भाव उत्पन्न होता है, यह रूद्राक्ष श्रद्धा एवं विश्वास का स्वरूप है। यह व्यापार में सफलता दिलाता है। आचार्य shukracharya लिखते हैं- दो मुखी रूद्राक्ष सांसारिक ऐश्वर्य व उपलब्धियां कराता है, तथा घर से क्लेश की जड़ को दूर करता है। दो मुखी रूद्राक्ष शिव और पार्वती का सम्मिलित स्वरूप है। इस रूद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। इस रूद्राक्ष की अद्भुत शक्ति से धारक का मन मस्तिष्क संतुलित रहता है। Dr.R.B.Dhawan के अनुसार शिवपुराण में दो मुखी रूद्राक्ष के लिए कहा गया है कि यह बेहद दुर्लभ और कल्याणकारी रूद्राक्ष है। नेपाल के द्विमुखी रूद्राक्ष चपटे, आँख की आकृति के होते हैं। दो मुखी रूद्राक्ष नेपाल में काफी कम होता है, तथा बहुत मँहगा भी होता है, इसलिये दो मुखी रूद्राक्ष रामेश्वरम का ही अधिक देखने को मिलता है। दो मुखी रूद्राक्ष को धारण करने से भगवान् शिव तथा माता पार्वती दोनों ही प्रसन्न होते हैं। दो मुखी रूद्राक्ष गोहत्या के पाप से मुक्ति दिलाता है, तथा यह मन मस्तिष्क दोनों को सन्तुलित रखता है। दो मुखी रूद्राक्ष अर्ध-नारीश्वर स्वरूप है, इसे शिव-शिवा रूप भी कह सकते हैं, दोमुखी रूद्राक्ष साक्षात् अग्नि स्वरूप हैं, जिसके शरीर पर ये प्रतिष्ठित करके धारण किया होता है, आचार्य shukracharya का मानना है कि उसके जन्म जन्मांतर के पाप उसी प्रकार नष्ट हो जाते हैं, जैसे अग्नि ईंधन को जला डालती है।

इस रूद्राक्ष के धारण करने से कुंडली में चन्द्रमा से उत्पन्न सभी दोषों का निवारण हो जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से चन्द्रमा हृदय, फेफडा, मन, वामनेत्र, गुर्दा, भोजन नली इत्यादि का कारक है। चन्द्रमा की प्रतिकूल स्थिति तथा दुष्प्रभाव के कारण हृदय तथा फेफड़ों के रोग हो सकते हैं। बांयी आँख की खराबी, खून की कमी, जल सम्बन्धी रोग, गुर्दा कष्ट, मासिक धर्म के रोग, स्मृति-भ्रंश इत्यादि रोग भी हो सकते हैं। इसके दुष्प्रभाव से दरिद्रता तथा मन मस्तिष्क विकार भी होते हैं। गुणों के हिसाब से यह मोती से कई गुना अधिक प्रभावी है। दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले धारक के परिजन परस्पर आदर व श्रद्धा की सतत् वृद्धि अनुभव करते हैं। द्विमुखी रूद्राक्ष शिक्षक व छात्र के बीच, पिता व पुत्र के बीच, पति व पत्नी के बीच या मित्रों में मतभेद मिटाता है, और एकात्मता उत्पन्न करता है। धारक शांतिमय पारिवारिक जीवन जीने के लिये सक्षम बन जाता है। इस रूद्राक्ष में अंर्तगर्भित ऐसी विद्युत तरंगें होती हैं कि जिन के प्रभाव से यह रूद्राक्ष सभी शारीरिक व्याधियों से रक्षा करता है, गुरू जी (Dr.R.B.Dhawan) अपने अनुभव लिखते हुए आगे कहते हैं- इस रूद्राक्ष को धारण करने से इनकम/सेल्स टैक्स अधिकारी व्यापारी को व सरकारी नौकरी वालों को उनके अधिकारी बेकार परेशान नहीं करते इस लिये इन्हें यह रूद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिये। यह शरीर की गर्मी को निकालता है, इससे रक्तचाप नियंत्रण में रहता है। मन मस्तिष्क की बीमारी भी सही हो जाती हैं। दो मुखी रूद्राक्ष को देवेश्वर भी कहा जाता है। दो मुखी रूद्राक्ष दांपत्य जीवन सुखमय बनाने के लिये अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। शिव और शक्ति की उपासना करने वाले को यह रूद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिये। इस रूद्राक्ष के स्वामी ग्रह चंद्रदेव हैं।

दो मुखी रूद्राक्ष धारण मंत्र- ॐ नमः ॐ शिव शक्तिभ्यां नमः।
चैतन्य करने का मंत्र- ॐ क्षी हृो क्षौं वो ॐ।।
उपयोग- आदर्श पारिवारिक जीवन, शांतिपूर्ण व स्थाई संबधों के लिये।

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अधिक जानकारी के लिए अथवा ज्योतिषीय परामर्श के लिए :- गुरू जी के कार्यालय में सम्पर्क करें :- 011-22455184, 09810143516

गुरू जी के लेख देखें :- astroguruji.in, aap ka bhavishya.in, rbdhawan@wordpress.com, guruji ke totke.com.

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पंद्रह मुखी रूद्राक्ष, 15 Mukhi Rudraksh

पंद्रह मुखी रूद्राक्ष, 15 Mukhi Rudraksh Nepal, 15 Mukhi Rudraksh Original Nepal,

Dr.R.B.Dhawan (गुरूजी) astrologer, Astrological Consultant, specialist : marriage problems, top best astrologer in delhi

रक्ष जाति के आचार्य shukracharya का वचन है कि- पंद्रहमुखी रूद्राक्ष अत्यन्त दुर्लभ रूद्राक्षों की श्रेणी में आता है। यह रूद्राक्ष परम प्रभावशाली तथा अल्प कालावधि में ही शिवजी को प्रसन्न करने वाला रूद्राक्ष है, यह रूद्राक्ष साक्षात् देवमणि है। गुरू जी (Dr.R.B.Dhawan) और पुराणों के अनुसार पंद्रह विद्या, का साक्षात रूप है। इसमें महादेव की विशेष शक्ति निहित होती है, इसलिये नवग्रहों से उत्पन्न दोष इसे धारण करने मात्र से शांत होते हैं। यह रूद्राक्ष कठिन से कठिन परिस्थितियों में धारण करने वाले का मार्गदर्शन करता है। जो व्यक्ति इस रूद्राक्ष को कंठ के मध्य में धारण करते हैं, वह सर्वत्र पूजित होते हैं, और अंत समय वे स्वर्ग को प्राप्त होते हैं। चमड़ी के जटिल से जटिल रोगों को दूर करने की इसमें शक्ति है। धारक को आत्मरक्षा करने में समर्थ बनाता है। यह रूद्राक्ष धारक को हानि, दुर्घटना, जटिल रोग, आर्थिक चिन्ता से मुक्त रखकर धारक को सुरक्षा-समृद्धि देता है। वैसे तो यह रूद्राक्ष सभी जटिल रोगों को दूर करने वाला माना गया है, फिर भी Dr.R.B.Dhawan के अनुभव अनुसार इस रूद्राक्ष में पौरुष रोग को दूर करने की महान शक्ति है। इसी लिए दुर्बल पुरुष के लिए अधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है, और इसीलिये इस की मांग अधिक होने से यह अधिक मूल्यावान भी होता है। वैसे भी यह रूद्राक्ष बहुत ही कम मात्रा में उत्पन्न होता है, और इसकी मांग इसकी उपलब्धता से कहीं अधिक है। पंद्रहमुखी रूद्राक्ष स्वास्थ्य लाभ, रोगमुक्ति और शारीरिक तथा मानसिक-व्यापारिक उन्नति में सहायक होता है। धारण करने पर आध्यात्मिक तथा भौतिक सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। इस रूद्राक्ष को धारण करने से शत्रुओं का नाश होता है, इस लिए यह रूद्राक्ष त्रिकाल सुखदायक है, यह समस्त रोगों का हरण करने वाला, सदैव आरोग्य प्रदान करने वाला है। इसके धारण करने से कुल की मर्यादा और कुल वृद्धि अवश्य होती है। इससे बल और उत्साह का वर्धन होता है, और निर्भयता प्राप्त होती है, तथा संकट काल में सरंक्षण भी प्राप्त होता है। पंद्रहमुखी रूद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति सदा सही निर्णय लेता है, और संकटों, कुपरिस्थितियों एवं चिंताओं से छुटकारा पाता है, धारणकर्ता में विशेष ओजस गुणों का विकास होने लगते हैं। यह शास्त्रोक्त सत्य है कि जिसने पंद्रहमुखी रूद्राक्ष धारण कर लिया, उसेे उत्तम संतान की प्राप्ति होती है, और गृहस्थ जीवन भी अच्छा होता है। गर्भपात रूक जाता है, व गुणवान संतान उत्पन्न होती है।

पंद्रहमुखी रूद्राक्ष धारण का मंत्र है- ॐ पशुपतय नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करते हुए धारण करें।
लाभ- अलौकिक मार्गदर्शन, जटिल और पौरुष रोगों की शांति।

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चौदह मुखी रूद्राक्ष, 14 Mukhi Rudraksh

चौदह मुखी रूद्राक्ष, 14 Mukhi Rudraksh Nepal, 14 Mukhi Rudraksh Original Nepal,

Dr.R.B.Dhawan (गुरूजी) Astrologer, Astrological Consultant, specialist : marriage problems, top best astrologer in delhi

असुराचार्य shukracharya के अनुसार- चौदह मुखी रूद्राक्ष अत्यन्त दुर्लभ रूद्राक्षों की श्रेणी में आता है। परम प्रभावशाली तथा अल्प समय में ही शिवजी को प्रसन्न करने वाला यह चौदह मुखी रूद्राक्ष साक्षात् देवमणि है। Dr.R.B.Dhawana जी का कथन है कि- पुराणों में वर्णित है कि यह रूद्राक्ष चौदह विद्या, 14 लोक, 14 मनु का साक्षात् रूप है। इसमें हनुमानजी की शक्ति भी निहित होती है, इसलिये शनि से संबंधित सभी दोष इसे धारण करने मात्र से शांत होते हैं। यह रूद्राक्ष आज्ञाचक्र का नियन्ता है। जो व्यक्ति इस रूद्राक्ष को कपाल के मध्य में धारण करते हैं, उनकी पूजा देवता और ब्राह्यण करते हैं, और वे निर्वाण (स्वर्ग) को प्राप्त हो जाते हैं। यह शिवजी तीसरे नेत्र के समान है, और धारक को आत्म रक्षा एवं कार्य के सही नियोजन में सहायक बनाता है। यह रूद्राक्ष धारक को हानि, दुर्घटना, रोग, चिन्ता से मुक्त रखकर साधक को सुरक्षा-समृद्धि देता है, यह रूद्राक्ष सभी रूद्राक्षों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है, और इसीलिये यह अधिक मूल्यावान होता है। ये बहुत ही कम संख्याओं में उत्पन्न होता है, और इसकी मांग इसकी उपलब्धता से कहीं अधिक होती है। चौदह मुखी रूद्राक्ष shukracharya संस्थान में उपलब्ध है, क्योंकि इस रूद्राक्ष को स्वयं भगवान शिव ने धारण किया था, इसे धारण करने से परिवार का कल्याण होता है, चतुर्दशमुखी रूद्राक्ष स्वास्थ्य लाभ, रोगमुक्ति और शारीरिक तथा मानसिक-व्यापारिक उन्नति में सहायक होता है। 14 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से आध्यात्मिक लाभ तथा भौतिक सुख तथा सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। इस रूद्राक्ष को मस्तक पर धारण करना चाहिये। जो मनष्य इसे मंत्र सिद्ध करके धारण करते हैं, वह रूद्रलोक में जाकर बसते हैं। इससे परमपद की प्राप्ति होती है, शत्रुओं का नाश होता है, बैकुंठ की प्राप्ति होती है। यह जेल भय से मुक्ति भी दिलाता है। यह रूद्राक्ष त्रिकाल सुखदायक है, यह समस्त रोगों का हरण करने वाला सदैव आरोग्य प्रदान करने वाला है। इसके धारण करने से वंशवृद्धि अवश्य होती है। इससे बल और उत्साह का वर्धन होता है। इससे निर्भयता प्राप्त होती है, और संकट काल में सरंक्षण प्राप्त होता है। विपत्ति और दुर्घटना से बचाव के लिये हनुमान जी (रूद्र) के प्रतीक माने जाने वाले इस 14 मुखी रूद्राक्ष को अवश्य प्रयोग करना चाहिये। चतुर्दशमुखी रूद्राक्ष धारक को भविष्य देखने की दृष्टि प्रदान करता है, यह ‘देवमणि’ रूद्राक्ष है। चतुर्दशमुखी रूद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति सदा सही निर्णय लेता है, और संकटों, कुपरिस्थितियों एवं चिंताओं से छुटकारा पाता है, तथा भूत-पिशाच, डाकिनी, शाकिनी का प्रकोप उसके निकट भी नहीं आता। धारणकर्ता में विशेष गुण विकसित होने लगते हैं। यह आचार्य shukracharya द्वारा शास्त्रोक्त सिद्ध है कि जिसने 14 मुखी रूद्राक्ष धारण कर लिया, शनि जैसा प्रतिकूल ग्रह भी अनुकूल हो जाता है। चौदह मुखी रूद्राक्ष की माला पुरूष या स्त्री द्वारा धारण करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है, और गृहस्थ जीवन भी अच्छा होता है। ग्यारह मुखी तथा चौदह मुखी दोनों रूद्राक्ष की माला को पेट पर बांधने से बार-बार हो जाने वाला गर्भपात नहीं होता। और उच्च कोटि की संतान उत्पन्न होती है।

14 मुखी रूद्राक्ष धारण का मंत्र है- ॐ नमः ॐ हनुमते नमः।
चैतन्य मंत्र- ॐ औं हस्फ्रें हसख्फ्रें। इस मंत्र से रूद्राक्ष को चैतन्य कर धारण करना चाहिये।
उपयोग- यह रूद्राक्ष भविष्य दर्शन, कल्पना शक्ति एवं ध्यान में सहायक है।

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गुरू जी के लेख देखें :- astroguruji.in, aap ka bhavishya.in, rbdhawan@wordpress.com, guruji ke totke.com.

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